भारत और ईरान के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट के प्रबंधन और संचालन को लेकर बातचीत का दौर नए सिरे से जारी है। अमेरिकी प्रतिबंधों और प्रशासनिक अनिश्चितताओं के बीच भारत चाबहार में अपने वाणिज्यिक व सामरिक हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार चाबहार पोर्ट के प्रबंधन के लिए स्थानीय पोर्ट अथॉरिटी (Local Port Authority) के साथ एक अंतरिम समझौता करने पर विचार कर रही है, ताकि अमेरिकी प्रतिबंध हटने पर इसके संचालन का पूर्ण अधिकार भारत को वापस सौंपा जा सके। भारत रणनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को संतुलित करते हुए चाबहार पर अपनी मौजूदगी बनाए रखने के प्रयास में जुटा है।
स्थानीय अथॉरिटी से समझौता और कानूनी गारंटी
भारत सरकार ईरान सरकार से कानूनी गारंटी और औपचारिक व्यवस्था की मांग कर रही है:
- प्रबंधन का हस्तांतरण: अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल (Shahid Beheshti Terminal) का अस्थायी प्रबंधन स्थानीय ईरानी अथॉरिटी को सौंपने पर चर्चा जारी है।
- अधिकारों की वापसी की शर्त: समझौते में यह स्पष्ट गारंटी शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है कि जैसे ही अमेरिकी प्रतिबंध हटेंगे या ढील मिलेगी, पोर्ट का प्रबंधन अधिकार पूरी तरह भारत को वापस दे दिया जाएगा।
- प्रतिबंधों की समयसीमा: भारत को अक्टूबर 2025 में अमेरिका से मिली 6 महीने की प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुकी है, जिससे नई वैकल्पिक कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता पड़ी है।
अमेरिकी रुख और ट्रंप प्रशासन पर निगाहें
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बदलते समीकरणों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कूटनीतिक फैसलों पर भारत की पैनी नजर है:
- शांति वार्ता की सुगबुगाहट: एक तरफ अमेरिका तेहरान के साथ शांति वार्ता का नया दौर शुरू करने पर विचार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध और टैरिफ की चेतावनियां भी बनी हुई हैं।
- ट्रंप की नीतियां: भारत को उम्मीद है कि अमेरिका के साथ भविष्य की वार्ताओं में चाबहार के क्षेत्रीय महत्व को देखते हुए अनुकूल रास्ता निकाला जा सकेगा।
भारत के लिए क्यों बेहद खास है चाबहार पोर्ट?
- पाकिस्तान को बाईपास कर सीधा रास्ता: यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान के रास्ते से गुजरे बिना सीधे अफगानिस्तान, मध्य एशियाई देशों और रूस (INSTC – उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा) तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है।
- चीन-पाकिस्तान (GWADAR) को संतुलन: पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज 210 किलोमीटर दूर स्थित चाबहार पोर्ट पर भारतीय उपस्थिति चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने का मुख्य जरिया है।
- रणनीतिक नुकसान से बचाव: यदि भारत चाबहार प्रोजेक्ट में अपनी भूमिका से पीछे हटता है, तो चीन इस खाली जगह को भरने और अफगानिस्तान व हिंद महासागर क्षेत्र में अपना दबदबा मजबूत करने के लिए तैयार बैठा है।


