संसद के मानसून सत्र के दौरान पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को रोकने के लिए लाए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर तीखी बहस देखने को मिली। राज्यसभा में चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला।
खरगे के बयान की प्रमुख बातें
- राजनीति बनाम युवाओं का भविष्य: खरगे ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के बजाय “राजनीति करने में व्यस्त रही है।”
- केवल कानून बनाना काफी नहीं: उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कड़े प्रावधानों वाला कानून बना देने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और डिजिटल सुरक्षा का स्वतंत्र ऑडिट नहीं होता, तब तक जवाबदेही तय नहीं हो सकती।
- छात्रों पर कार्रवाई का विरोध: खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं ने नीट (NEET) और अन्य परीक्षाओं में धांधली का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज पर गहरी आपत्ति जताई तथा सरकार से सवाल पूछे।
क्या है लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026?
संसद में पेश यह विधेयक प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, Railways, NTA आदि) को पारदर्शी बनाने और नकल माफिया पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया है। इसके तहत:
- कड़ी सजा व भारी जुर्माना: संगठित परीक्षा अपराधों के लिए 7 से 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट और जांच दल: मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन और दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का प्रस्ताव है।
सदन में जहाँ सत्तापक्ष ने इसे पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के लिए ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं खरगे के नेतृत्व में विपक्ष ने प्रशासनिक विफलता और सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए।


