दुनियाभर में गहराते ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) के बीच भारत समेत कई देशों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वर्तमान में लगभग 40 देशों में ईंधन की भारी कमी के चलते राशनिंग और ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) जैसी पाबंदियां लागू की गई हैं। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा बचत की अपील की है और स्वयं एक उदाहरण पेश किया है।
वैश्विक स्थिति: ईंधन की राशनिंग और पाबंदियां
रूस-यूक्रेन संघर्ष और सप्लाई चेन में आए व्यवधानों के कारण दुनिया के 40 से अधिक देशों में बिजली और पेट्रोल-डीजल का संकट पैदा हो गया है।
- ईंधन राशनिंग: कई यूरोपीय और एशियाई देशों में पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सीमा तय कर दी गई है ताकि स्टॉक को लंबे समय तक चलाया जा सके।
- वर्क फ्रॉम होम: यातायात में ईंधन की खपत कम करने के लिए सरकारों ने निजी और सरकारी दफ्तरों में फिर से ‘वर्क फ्रॉम होम’ अनिवार्य करना शुरू कर दिया है।
- बिजली की बचत: कई शहरों में रात के समय स्ट्रीट लाइटें बंद की जा रही हैं और कमर्शियल संस्थानों को बिजली के उपयोग में कटौती के निर्देश दिए गए हैं।
पीएम मोदी की पहल: काफिले में कटौती और ई-वाहन
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में ऊर्जा संरक्षण को ‘राष्ट्र सेवा’ करार दिया है। उन्होंने न केवल जनता से अपील की, बल्कि अपनी सुरक्षा और प्रोटोकॉल में भी बड़े बदलाव किए हैं:
- काफिले का आकार घटाया: पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या को सीमित करने का आदेश दिया है ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके।
- इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता: प्रधानमंत्री के काफिले में अब धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधन वाली गाड़ियों की जगह अत्याधुनिक ई-वाहन शामिल किए जाएंगे।
- अनावश्यक यात्राओं पर रोक: सरकारी स्तर पर अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें करने और अनावश्यक हवाई यात्राओं से बचने का सुझाव दिया गया है।
देशवासियों से अपील: “बचत ही भविष्य है”
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से ऊर्जा बचाने के लिए कुछ बुनियादी आदतों को अपनाने का आग्रह किया है:
- सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस या साइकिल का अधिक उपयोग करें।
- बिजली उपकरणों का सही उपयोग: उपयोग न होने पर लाइट और एयर कंडीशनर (AC) बंद रखें।
- सौर ऊर्जा को बढ़ावा: घरों और कार्यालयों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने पर जोर दें।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। वैश्विक संकट के इस दौर में पीएम मोदी की यह “मितव्ययिता” (Austerity) नीति न केवल सरकारी खर्च कम करने के लिए है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


