भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल मानसून अपने निर्धारित समय से थोड़ा पहले दस्तक दे सकता है। सामान्यतः 1 जून को केरल पहुंचने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार 25 से 27 मई के बीच केरल तट पर पहुंच सकता है।
मानसून के जल्दी आने के संकेत
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में परिस्थितियां मानसूनी हवाओं के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हो गई हैं।
- अंडमान में आगमन: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मानसून के 16 से 17 मई के आसपास पहुंचने की संभावना है।
- दबाव का क्षेत्र: श्रीलंका के तट के पास बने कम दबाव के क्षेत्र के उत्तर की ओर बढ़ने से मानसूनी हवाओं को गति मिल रही है। यदि यह गति बनी रही, तो केरल में मानसून की एंट्री समय से 4-5 दिन पहले हो सकती है।
पांच राज्यों में आंधी और बारिश का अलर्ट
एक तरफ जहां मानसून की आहट है, वहीं उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से मौसम का मिजाज बदल गया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए पांच प्रमुख राज्यों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है:
- उत्तर प्रदेश: लखनऊ, बरेली और शाहजहांपुर सहित कई जिलों में 70-75 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश होने की संभावना है।
- राजस्थान: धूल भरी आंधी के साथ हल्की बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
- पंजाब और हरियाणा: यहां गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की उम्मीद है, जिससे भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।
- मध्य प्रदेश: राज्य के पश्चिमी हिस्सों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है।
- केरल और तमिलनाडु: दक्षिण भारत के इन राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे भारी बारिश के आसार हैं।
गर्मी और उमस से राहत
मंगलवार और बुधवार को हुई बारिश के कारण उत्तर भारत के कई शहरों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 14 मई के बाद मौसम फिर से शुष्क हो सकता है, जिससे उमस और गर्मी में बढ़ोतरी होगी।
“बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण इस बार मानसून की शुरुआती प्रगति अच्छी दिख रही है। हालांकि, अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव के चलते इस साल कुल बारिश सामान्य से थोड़ी कम (करीब 92%) रहने का अनुमान है।”
मानसून के जल्दी आगमन की खबरों ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है, क्योंकि इससे खरीफ फसलों की बुआई के लिए तैयारी का अतिरिक्त समय मिल सकेगा।


