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    ‘सतलुज’ के कंटेंट की होगी जांच, क्या है कहानी? सरकार को है यह ऐतराज?

    अभिनेता दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘सतलुज’ (Satluj) को लेकर विवाद गहरा गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने आईटी नियम, 2021 के तहत एक अंतर्विभागीय समिति (Inter-Departmental Committee – IDC) का गठन कर फिल्म के कंटेंट की जांच करने का नया कदम उठाया है। इससे ठीक पहले सरकार के निर्देश पर ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) ने रिलीज के महज दो दिन बाद ही इस फिल्म को भारत में अपने प्लेटफॉर्म से हटा (Take down) दिया था।

    क्या है फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी?

    • जसवंत सिंह खालड़ा की बायोपिक: यह फिल्म पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता (Human Rights Activist) जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके कड़े संघर्ष पर आधारित है।
    • संवेदनशील विषय: फिल्म में 1990 के दशक के उस दौर को दिखाया गया है जब पंजाब उग्रवाद (Terrorism) से जूझ रहा था। जसवंत सिंह खालड़ा ने पुलिस द्वारा किए गए कथित ‘फेक एनकाउंटर’ और हजारों ‘लावारिस’ शवों के गैर-कानूनी अंतिम संस्कार का पर्दाफाश किया था। इसके बाद 1995 में वह खुद भी रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे।
    • शीर्षक बदलने का इतिहास: यह फिल्म पिछले साढ़े तीन साल से सेंसर बोर्ड (CBFC) के पास अटकी हुई थी। पहले इसका नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया, फिर बदलकर ‘पंजाब 95’ किया गया और आखिरकार भारी आपत्तियों के बाद इसे ‘सतलुज’ नाम से 3 जुलाई 2026 को जी5 पर रिलीज किया गया था।

    क्यों बढ़ गई सरकार की सख्ती? (मंत्रालय का तर्क)

    सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, मेकर्स ने फिल्म को ओटीटी पर रिलीज करने के दौरान नियमों का उल्लंघन किया है:

    • सेंसर बोर्ड की कैंची से बचने का आरोप: केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने इस फिल्म के थिएट्रिकल रिलीज के लिए करीब 120 से अधिक कट्स लगाने की सिफारिश की थी। मंत्रालय का आरोप है कि मेकर्स ने उन बदलावों को लागू करने के बजाय फिल्म का नाम बदला और बिना जरूरी कट्स के (अनकट वर्जन) इसे सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम कर दिया।
    • आईटी नियमों का उल्लंघन: सरकार का कहना है कि यह कदम ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021’ का उल्लंघन है।
    • सुरक्षा और कानून व्यवस्था: खुफिया इनपुट्स के अनुसार, फिल्म में तत्कालीन सरकारी तंत्र और पुलिस की कार्यप्रणाली को बेहद नकारात्मक दिखाया गया है, जिससे पंजाब में विधानसभा चुनावों से पहले माहौल खराब होने और भारत विरोधी ताकतों द्वारा इसका गलत इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी। इसी वजह से आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत इसे ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया।

    विवाद पर दिलजीत दोसांझ और राजनीतिक प्रतिक्रिया

    फिल्म को अचानक हटाए जाने के बाद पंजाब की राजनीति और सिने जगत में भूचाल आ गया है:

    • दिलजीत दोसांझ का बयान: इंस्टाग्राम लाइव के दौरान दिलजीत ने कहा कि उन्हें इस बैन की पहले से ही उम्मीद थी। उन्होंने संतोष जताते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि हमारा काम लोगों तक उस रूप में पहुंच गया जैसा हम चाहते थे। लोग इसे डाउनलोड कर चुके हैं और गुरुद्वारा साहिब में प्रोजेक्टर लगाकर भी देख रहे हैं।” दरअसल, ओटीटी से हटने के बाद यह फिल्म सोशल मीडिया पर लीक हो चुकी है.
    • विपक्ष का हमला: कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेताओं ने इसे ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला’ और सच को दबाने की कोशिश करार दिया है।

    आगे क्या होगा? अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित आईडीसी (IDC) कमेटी फिल्म के सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी, जिसके बाद ही तय होगा कि यह फिल्म भारत में दोबारा स्ट्रीम हो पाएगी या नहीं।

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