तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) प्रमुख एम.के. स्टालिन ने परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी दी है। विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के बीच, उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि वे “आग से न खेलें”। केंद्र सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का प्रस्ताव रखा है। यह ऐतिहासिक बदलाव 16 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में पेश किया जाना है। विधेयक पारित होने के बाद एक नए परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जो देश भर में निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाएं तय करेगा।
स्टालिन की “अंतिम चेतावनी”
स्टालिन ने केंद्र सरकार द्वारा 16 से 18 अप्रैल 2026 तक बुलाए गए संसद के विशेष सत्र पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाना लोकतंत्र पर हमला है। केंद्र सरकार बिना राज्यों की सहमति के परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन “बुलडोजर” की तरह थोपना चाहती है। यदि तमिलनाडु के अधिकारों का हनन हुआ या दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक शक्ति कम की गई, तो देश 1950 और 60 के दशक (हिंदी विरोधी आंदोलन) जैसा उग्र आंदोलन देखेगा।
विवाद की मुख्य जड़: दक्षिण बनाम उत्तर
परिसीमन का अर्थ है लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या का पुनर्निर्धारण। स्टालिन का तर्क है कि तमिलनाडु जैसे राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरीन काम किया है। अब जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ाने से उत्तर भारतीय राज्यों (जहाँ जनसंख्या अधिक है) को फायदा होगा और दक्षिण को नुकसान। यदि लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जाती हैं, तो संसद में दक्षिण भारत की आवाज कमजोर हो सकती है।
चुनाव प्रचार में वार-पलटवार
- भाजपा का रुख: भाजपा नेताओं का कहना है कि परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है और स्टालिन चुनाव के समय जनता को भ्रमित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी आज नागरकोइल में रोड शो कर रहे हैं, जहाँ वे इस पर जवाब दे सकते हैं।
- विपक्ष की एकजुटता: तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने भी स्टालिन का समर्थन करते हुए दक्षिणी राज्यों का ‘यूनाइटेड फ्रंट’ बनाने का आह्वान किया है।
स्टालिन का कड़ा संदेश: “इसे धमकी न समझें, यह तमिलनाडु की ओर से चेतावनी है। अगर हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुँची, तो पूरा राज्य सड़कों पर होगा और हर घर से विरोध की आवाज उठेगी।”
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है, और उससे ठीक पहले परिसीमन का यह मुद्दा राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा ‘इलेक्शन कार्ड’ बन गया है।


