केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) की जीत के बावजूद, नेतृत्व के चयन पर आम सहमति नहीं बन पा रही है। इसी गतिरोध को सुलझाने के लिए केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष के. सुधाकरन आज दिल्ली पहुंचे हैं, जहां वह पार्टी आलाकमान के साथ निर्णायक बैठक करेंगे।
मुख्यमंत्री पद पर रस्साकशी केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए मुख्य रूप से 3 बड़े चेहरों के बीच मुकाबला माना जा रहा है।के. सुधाकरन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते वह फ्रंटरनर माने जा रहे हैं। वी.डी. सतीशन विपक्ष के पूर्व नेता के रूप में उनकी छवि और युवाओं के बीच उनकी पकड़ उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है। यदि सुधाकरन और सतीशन के बीच सहमति नहीं बनती है, तो के.सी. वेणुगोपाल एक ‘डार्क हॉर्स’ (Dark Horse) या सर्वसम्मत उम्मीदवार के रूप में उभर सकते हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नवनिर्वाचित विधायकों की राय बंटी हुई है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी के साथ होने वाली बैठक में विधायकों की गुप्त वोटिंग की रिपोर्ट पर चर्चा होगी, जिसके बाद ही अंतिम नाम पर मुहर लगने की संभावना है।
बसवराज बोम्मई का कांग्रेस पर तीखा हमला
इस बीच, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस की इस आंतरिक खींचतान पर तंज कसा है। उन्होंने केरल के राजनीतिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस एक ऐसी पार्टी बन गई है जो पूरी तरह से “दूसरों के सहारे” चल रही है। बोम्मई ने तर्क दिया कि कांग्रेस अपने दम पर सत्ता में आने की स्थिति में नहीं है और वह क्षेत्रीय दलों (IUML जैसे सहयोगियों) के दबाव में है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास न तो स्पष्ट विजन है और न ही मजबूत केंद्रीय नेतृत्व, जिसके कारण चुनाव जीतने के बाद भी मुख्यमंत्री तय करने में हफ्तों लग रहे हैं।
केरल की राजनीति का वर्तमान परिदृश्य
केरल में इस बार का चुनाव परिणाम ऐतिहासिक रहा है, जहां सत्ता विरोधी लहर के चलते एलडीएफ (LDF) को सत्ता से बाहर होना पड़ा है। हालांकि, मुख्यमंत्री के नाम में देरी से यूडीएफ के भीतर असंतोष पनपने का खतरा बढ़ गया है। सहयोगी दल विशेष रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी इस फैसले पर करीबी नजर रखे हुए है, क्योंकि उनकी भूमिका सरकार के स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण होगी।
कांग्रेस आलाकमान के लिए चुनौती केवल मुख्यमंत्री चुनना नहीं है, बल्कि गुटबाजी को रोकना भी है। यदि दिल्ली में आज की बैठक बेनतीजा रहती है, तो केरल में सरकार गठन की प्रक्रिया में और देरी हो सकती है, जिसका सीधा लाभ विपक्ष को हमला करने का मौका देगा। अब सबकी नजरें सोनिया गांधी और खड़गे के फैसले पर टिकी हैं।


