करियर में बदलाव और सफलता की कहानियों के बीच डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम की कहानी प्रेरणा का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है। एक सफल चिकित्सा करियर और शहर की चकाचौंध को छोड़कर उन्होंने मिट्टी से जुड़ने का फैसला किया। आज उनका टर्नओवर करोड़ों में है, जो यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक और लगन से खेती को भी एक लाभप्रद बिजनेस बनाया जा सकता है।
डॉक्टर से किसान बनने का सफर
हैदराबाद के रहने वाले डॉ. श्रीनिवास राव एक सफल डॉक्टर थे, लेकिन उनका मन हमेशा से प्रकृति और कृषि की ओर झुका रहा। उन्होंने अपने ‘सफेद कोट’ को उतारकर खेती के मैदान में उतरने का साहसी निर्णय लिया। उन्होंने शहर की आरामदायक जिंदगी छोड़ दी और अपने पुश्तैनी गांव की ओर रुख किया ताकि खेती में कुछ नया कर सकें।
‘एग्जॉटिक फ्रूट्स’ (विदेशी फलों) पर दांव
परंपरागत खेती (जैसे गेहूं या धान) के बजाय, डॉ. श्रीनिवास ने बाजार की मांग को समझा। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट (Dragon Fruit) जैसे विदेशी और उच्च मूल्य वाले फलों की खेती शुरू की।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: उन्होंने खेती में अपने मेडिकल बैकग्राउंड के वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उपयोग किया। मिट्टी की जांच, सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन और खाद के संतुलित उपयोग पर ध्यान दिया।
- चुनौतियां: शुरुआत में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि ड्रैगन फ्रूट के लिए विशेष देखभाल और जलवायु की आवश्यकता होती है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
सालाना ₹3.39 करोड़ का टर्नओवर
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, डॉ. श्रीनिवास की मेहनत रंग लाई है। उनके कृषि स्टार्टअप ने इस साल ₹3.39 करोड़ का शानदार टर्नओवर हासिल किया है। उन्होंने न केवल फल उगाए, बल्कि उनकी बेहतर मार्केटिंग और सप्लाई चेन पर भी काम किया। आज उनके उगाए फल बड़े शहरों के प्रीमियम स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बेचे जा रहे हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
डॉ. श्रीनिवास अब केवल एक किसान नहीं, बल्कि एक एग्रो-एंटरप्रेन्योर (Agri-Entrepreneur) के रूप में उभरे हैं।उनके फार्म हाउस पर कई स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए एक कड़ा संदेश है जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि सही तकनीक और व्यावसायिक विजन हो, तो खेती किसी भी कॉर्पोरेट नौकरी से बेहतर परिणाम दे सकती है।
डॉ. श्रीनिवास राव माधवराम की कहानी ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (शहर से गांव की ओर वापसी) का एक बेहतरीन उदाहरण है। ₹3.39 करोड़ का टर्नओवर यह दर्शाता है कि जब शिक्षा और अनुभव का संगम मिट्टी के साथ होता है, तो सोना ही पैदा होता है। उनकी यह ‘सक्सेस स्टोरी’ देश के हजारों शिक्षित युवाओं को कृषि क्षेत्र में नवाचार करने के लिए प्रेरित कर रही है।


