पंजाबी अभिनेता और सिंगर दिलजीत दोसांझ की अपकमिंग फिल्म ‘सतलज’ (Satluj) इन दिनों जबरदस्त चर्चा में है। यह फिल्म पंजाब के इतिहास के एक बेहद संवेदनशील और काले दौर पर आधारित है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता (Human Rights Activist) जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभा रहे हैं।
जसवंत सिंह खालरा कौन थे, उन्होंने पंजाब में क्या खोज की थी और कैसे अंत में पुलिस हिरासत में उनकी जान चली गई, आइए विस्तार से जानते हैं।
कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
जसवंत सिंह खालरा पंजाब के अमृतसर में एक बैंक (गुरु नानक देव को-ऑपरेटिव बैंक) में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। 1980 के दशक के उत्तरार्ध और 1990 के दशक की शुरुआत में, जब पंजाब आतंकवाद और पुलिस के कड़े उग्रवाद-विरोधी अभियानों के दौर से गुजर रहा था, तब राज्य में हजारों की संख्या में युवा अचानक गायब होने लगे।
खालरा ने इन गायब हुए लोगों के सच का पता लगाने के लिए एक निजी स्तर पर जांच शुरू की।
25,000 अज्ञात शवों का खौफनाक सच
जसवंत सिंह खालरा ने अपनी जांच के दौरान अमृतसर, तरनतारन और मजीठा जैसे क्षेत्रों के श्मशान घाटों से गुप्त रूप से नगर पालिका के रिकॉर्ड, लकड़ियों की खरीद की रसीदें और पुलिस रिकॉर्ड इकट्ठा किए। उनके द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों से एक दहला देने वाला सच सामने आया:
- लावारिस बताकर दाह संस्कार: पंजाब पुलिस ने हजारों सिख युवाओं को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया, उन्हें मार डाला और फिर उनके शवों को ‘लावारिस’ (Unclaimed) या ‘अज्ञात’ बताकर चुपचाप श्मशान घाटों में जला दिया।
- अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुलासा: खालरा ने दावा किया कि पंजाब में लगभग 25,000 ऐसे युवाओं का अवैध रूप से दाह संस्कार किया गया था।
- कनाडा में गवाही: 1995 में वे कनाडा गए और वहां की संसद और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के सामने इन पुख्ता सबूतों को पेश किया, जिससे वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया।
पहले भारी टॉर्चर, फिर फर्जी एनकाउंटर
कनाडा से लौटने के बाद जसवंत सिंह खालरा को लगातार धमकियां मिलने लगीं। उन्हें पुलिस के आला अधिकारियों की तरफ से जांच रोकने को कहा गया, लेकिन वे पीछे नहीं हटे।
- 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालरा को अमृतसर में उनके घर के बाहर से दिन-दहाड़े पुलिसकर्मियों द्वारा अगवा कर लिया गया।
- उन्हें तरनतारन के झबाल पुलिस स्टेशन में अवैध हिरासत में रखा गया, जहां तत्कालीन पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें कई दिनों तक अमानवीय यातनाएं (Third-degree torture) दी गईं ताकि वे अपना बयान बदल लें।
- जब उन्होंने घुटने टेकने से मना कर दिया, तो अक्टूबर 1995 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई (फर्जी एनकाउंटर) और उनके शव को हरीके पत्तन (Harike Pattan) के पास सतलज नदी और नहर के संगम में फेंक दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई की जांच
जसवंत सिंह खालरा के गायब होने के बाद उनकी पत्नी परमजीत कौर खालरा ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई (CBI) ने मामले की जांच की।
सीबीआई जांच में खालरा के दावों को सही पाया गया। साल 2005 में, अदालत ने खालरा के अपहरण और हत्या के मामले में छह पुलिस अधिकारियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। जसवंत सिंह खालरा को आज भी सिख इतिहास और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक ‘शहीद’ के रूप में याद किया जाता है। दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलज’ उनके इसी संघर्ष और शहादत की कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करने जा रही है।


