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    जून में कई राज्यों में भीषण हीटवेव, सामान्य से कम होगी बारिश, IMD का चिंताजनक पूर्वानुमान

    देश में भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर बेहद चिंताजनक अपडेट जारी किया है। आईएमडी ने अपनी ‘सेकंड स्टेज लॉन्ग रेंज फोरकास्ट’ में मानसून के पूर्वानुमान को और घटा दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के दौरान देश में सामान्य से कम (Below Normal) बारिश होने की आशंका है, जिससे कृषि क्षेत्र, महंगाई और पानी की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    पूर्वानुमान में कटौती: केवल 90% बारिश की उम्मीद पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि इस साल देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

    • गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल में जारी शुरुआती अनुमान में आईएमडी ने 92% बारिश की उम्मीद जताई थी, जिसे अब घटाकर 90% कर दिया गया है।
    • मौसम विज्ञान की भाषा में जब बारिश 90 से 95% के बीच होती है, तो उसे ‘सामान्य से कम’ माना जाता है।

    चिंता की सबसे बड़ी वजह

    ‘सुपर अल नीनो’ का खतरा मानसून के कमजोर रहने की मुख्य वजह प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रही अल नीनो (El Niño) की स्थिति है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी ‘सुपर अल नीनो’ को लेकर चेतावनी जारी की है। डॉ. रविचंद्रन ने बताया, “हम जून-जुलाई में अल नीनो का सामना करने जा रहे हैं। अगस्त में यह मध्यम और सितंबर आते-आते यह मध्यम से ‘मजबूत’ (Strong) श्रेणी में पहुंच जाएगा। अल नीनो का सीधा संबंध भारत में कमजोर और असमान मानसून से होता है।”

    जून में बढ़ेगी तपिश, इन राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    कमजोर मानसून के साथ-साथ मौसम विभाग ने जून के महीने में देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक हीटवेव (लू के दिन) चलने की चेतावनी दी है। जून महीने में जिन राज्यों में भीषण लू का प्रकोप रहेगा, उनमें शामिल हैं:

    • उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार
    • ओडिशा, छत्तीसगढ़ और गुजरात
    • आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के कुछ हिस्से
    • राहत की बात: राजस्थान और झारखंड में लू के दिन सामान्य से कम रहने की उम्मीद है।

    किसानों के मुख्य बेल्ट (Core Zone) पर सबसे ज्यादा मार

    मौसम विभाग के अनुसार, देश के उत्तर-पश्चिम हिस्से (Northwest India) में बारिश 92% से कम और मध्य भारत (Central India) व दक्षिण प्रायद्वीप के मुख्य कृषि क्षेत्रों (Monsoon Core Zone) में बारिश 94% से कम रहने का अनुमान है। यह वह क्षेत्र है जहां मुख्य रूप से बारिश के भरोसे दालें (Pulses) और तिलहन (Oilseeds) उगाए जाते हैं। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत (North East India) में सामान्य या सामान्य से अधिक (94-106%) बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस बीच, सरकार ने स्थिति से निपटने और खरीफ फसलों को बचाने के लिए अभी से आकस्मिक योजना (Contingency Plan) पर काम शुरू कर दिया है।

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