उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव को एक बड़ी राजनीतिक चुनौती दी है। हाथरस में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला और उनसे अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर ‘श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन’ चलाने की मांग की।
सीएम योगी की अखिलेश यादव को सीधी चुनौती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सपा की राजनीति और उनके सांस्कृतिक रुख पर जमकर निशाना साधा। सीएम योगी ने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में हिंदू भावनाओं और सनातन संस्कृति का सम्मान करते हैं, तो उन्हें आगे आकर मथुरा में भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए एक बड़ा आंदोलन शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह देश ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए एक लंबा और ऐतिहासिक आंदोलन देखा, वैसी ही इच्छाशक्ति विपक्ष को मथुरा के लिए भी दिखानी चाहिए।
तुष्टिकरण की राजनीति पर तीखा प्रहार
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया।
- कारसेवकों पर गोलीबारी का जिक्र: सीएम योगी ने सपा के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि यह वही पार्टी है जिसके शासनकाल में अयोध्या में राम भक्तों और निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलवाई गई थीं।
- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बनाम वोट बैंक: उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जहां एक तरफ अयोध्या, काशी और मथुरा के गौरव को पुनर्स्थापित कर रही है, वहीं विपक्ष हमेशा इन पवित्र स्थलों के विकास और उनके इतिहास से दूरी बनाए रखता है ताकि उनका विशेष वोट बैंक नाराज न हो जाए।
चुनावी और सियासी मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए सीएम योगी का यह बयान बेहद अहम है।
अखिलेश यादव अक्सर खुद को भगवान कृष्ण का वंशज (यदुवंशी) बताते रहे हैं और कई मौकों पर कह चुके हैं कि भगवान कृष्ण उनके सपनों में आते हैं। योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश के इसी ‘कृष्ण प्रेम’ को ढाल बनाकर उन पर यह बड़ा सियासी हमला बोला है, ताकि सपा को बैकफुट पर धकेला जा सके और मथुरा के मुद्दे पर उनकी स्थिति को जनता के सामने स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल इस तीखे बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंदिर बनाम विकास और तुष्टिकरण की बहस तेज हो गई है।


