वेब सीरीज रिव्यू: रक्तांचल सीजन 3 — बदले की आग में जल रहे वसीम और विजय की दमदार वापसी
क्रिटिक रेटिंग: 3.0/5
प्लेटफॉर्म: अमेज़न एमएक्स प्लेयर (Amazon MX Player)
निर्देशक: रितम श्रीवास्तव
मुख्य कलाकार: क्रांति प्रकाश झा, निकितिन धीर, माही गिल, करण पटेल, विक्रम कोचर, सौंदर्या शर्मा
पूर्वांचल की राजनीति, गैंगवार और आपसी दुश्मनी पर आधारित लोकप्रिय क्राइम-थ्रिलर फ्रेंचाइजी ‘रक्तांचल’ अपने तीसरे सीजन के साथ वापस आ गई है। 16 जुलाई 2026 को रिलीज हुआ ‘रक्तांचल सीजन 3’ इस बार इलाके पर कब्जे की राजनीतिक लड़ाई से कहीं आगे बढ़कर दो कट्टर दुश्मनों के बीच के निजी और खूनी बदले पर केंद्रित है। निर्देशक रितम श्रीवास्तव ने इस बार कहानी में अपराध और पावर प्ले के साथ-साथ तगड़ा इमोशनल एंगल भी जोड़ा है, जो दर्शकों को बांधे रखता है।
क्या है सीजन 3 की कहानी?
आठ कड़ियों (एपिसोड) के इस सीजन की शुरुआत एक बेहद दिलचस्प मोड़ से होती है। पिछले सीजन के अंत में मरा हुआ मान लिया गया विजय सिंह (क्रांति प्रकाश झा) जिंदा है और उसकी वापसी से पूर्वांचल के सारे पुराने समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं। कहानी की शुरुआत में एक ट्रक ड्राइवर को घने जंगल में बुरी तरह घायल वसीम खान (निकितिन धीर) मिलता है, जिसे वह बचाता है। वसीम जब होश में आता है, तो हमलावर के रूप में विजय सिंह का नाम लेता है, जिससे सभी के होश उड़ जाते हैं।
इस सीजन में दोनों के बीच का टकराव अधिक व्यक्तिगत और गहरा हो जाता है। विजय अपनी पत्नी रोली (सौंदर्या शर्मा) की मौत के गम में डूबा है और अब वह किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ वसीम खान से अपना हिसाब चुकता करने और बदला लेने की आग में जल रहा है। वहीं दूसरी तरफ, बिलाल (शशि चतुर्वेदी) विजय को बाहर निकालने के लिए उसकी मां को निशाना बनाता है। इस बीच, बाबा खान राजनेता सरस्वती देवी (माही गिल) से वसीम की सुरक्षा की गुहार लगाते हैं, जबकि कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शहर में नए एसीपी हिमांशु पटनायक (करण पटेल) की एंट्री होती है, जो एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करते हैं।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
निर्देशक रितम श्रीवास्तव ने उस गंभीर, डार्क और ‘रॉ’ (Raw) माहौल को बरकरार रखने में पूरी कामयाबी हासिल की है, जिसके लिए रक्तांचल जानी जाती है। देसी अंदाज के एक्शन सीन और देहाती लोकेशन कहानी को वास्तविकता के बेहद करीब ले जाते हैं। हालांकि, स्क्रीनप्ले की रफ्तार एक-समान नहीं है। कुछ जगहों पर कहानी में दोहराव महसूस होता है और एक ही तरह के भावनात्मक टकराव बार-बार देखने को मिलते हैं। बदले का एंगल कहानी में गहराई तो लाता है, लेकिन इससे कुछ हद तक सस्पेंस और रोमांच कम हो जाता है। कुछ सब-प्लॉट को और बेहतर तरीके से बुना जा सकता था।
अभिनय और तकनीकी पक्ष
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकारों की बेहतरीन एक्टिंग है। वसीम खान के रोल में निकितिन धीर ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया है। उनका डरावना लुक और स्क्रीन प्रेजेंस एक खूंखार गैंगस्टर के रूप में बेहद भरोसेमंद लगती है, जबकि उनके कमजोर भावनात्मक पलों को भी उन्होंने बखूबी निभाया है। क्रांति प्रकाश झा ने विजय सिंह के रूप में दर्द और बदले की भावना के बीच झूलते किरदार को बखूबी जिया है।
नए किरदार के रूप में करण पटेल (ACP हिमांशु पटनायक) की एंट्री दमदार है। उनकी शांत बॉडी लैंग्वेज और कड़क डायलॉग डिलीवरी प्रभावित करती है। माही गिल ने राजनेता सरस्वती देवी के रूप में हमेशा की तरह प्रभावी काम किया है। विक्रम कोचर, सौंदर्या शर्मा, प्रमोद पाठक और राजेश कुमार जैसे सह-कलाकारों ने भी कहानी को अच्छा सपोर्ट दिया है। तकनीकी तौर पर, सिनेमैटोग्राफी ने पूर्वांचल के ऊबड़-खाबड़ और देहाती इलाकों को बेहतरीन तरीके से दिखाया है। बैकग्राउंड स्कोर तनाव को बढ़ाता है और एक्शन कोरियोग्राफी भी असरदार है।
क्यों देखें?
यदि आप ‘रक्तांचल’ के पिछले दो सीजन देख चुके हैं और वसीम-विजय की दुश्मनी के अंजाम को देखना चाहते हैं, तो हाई-स्टेक ड्रामा और बेहतरीन ट्विस्ट से भरपूर यह सीजन आपको जरूर पसंद आएगा। हालांकि, नए दर्शकों को कहानी और इसके भावनात्मक पहलुओं को समझने के लिए पहले पुराने सीजन देखने की जरूरत पड़ सकती है।


