लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार (19 जून 2026) को अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के तमाम दिग्गज नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस अवसर पर भी कांग्रेस नेता पर तीखा तंज कसने का मौका नहीं छोड़ा।
बीजेपी के नेशनल आईटी डिपार्टमेंट के इंचार्ज अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर राहुल गांधी की उम्र को लेकर एक पोस्ट साझा की, जो इस समय सियासी गलियारों में काफी चर्चा बटोर रही है।
बीजेपी का ‘सीनियर सिटिजन’ वाला तंज
अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में राहुल गांधी की राजनीति और उनकी उम्र पर सवाल उठाते हुए लिखा, “राहुल गांधी अब सीनियर सिटिजन (वरिष्ठ नागरिक) बनने से महज चार साल दूर हैं। राजनीति में दो दशकों के बाद, अनगिनत बार लॉन्च होकर, रिब्रांडिंग अभियानों, यात्राओं, चर्चाओं और बार-बार ‘बड़े होने’ वाले चरणों के बाद अब तो थोड़ी और राजनीतिक परिपक्वता की उम्मीद की जा सकती थी।”
मालवीय ने सीधे शब्दों में हमला बोलते हुए आगे कहा कि भारत की जनता ने अब तक राहुल गांधी की सिर्फ उम्र को बढ़ते हुए देखा है, लेकिन उनके राजनीतिक रूप से समझदार होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
पीएम मोदी ने दीं शुभकामनाएं
इस राजनीतिक छींटाकशी से इतर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरिमा बनाए रखते हुए राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई दी। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना करता हूं।”
पीएम मोदी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (थलपति विजय) समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के कई नेताओं ने राहुल गांधी को संविधान की रक्षा और वंचितों की आवाज उठाने वाला नेता बताते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना की।
वाराणसी में ‘भगवान परशुराम’ के रूप में दुग्धाभिषेक
राहुल गांधी के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी (पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र) में एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जिसने एक नए सियासी घमासान को जन्म दे दिया है।
यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी की एक बड़ी तस्वीर को गंगा नदी के बीच ले जाकर दूध से नहलाया और फूलों की बारिश की। इस तस्वीर में राहुल गांधी को ‘भगवान परशुराम’ के रूप में दिखाया गया है, जिनके एक हाथ में फरसा (परशुराम का प्रतीक) और दूसरे हाथ में भारत के संविधान की कॉपी है। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए, कांग्रेस के इस कदम को सूबे की ‘ब्राह्मण राजनीति’ को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


