पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पंजाब कांग्रेस के भीतर एक बार फिर अंदरूनी कलह और गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के गुटों के बीच जारी इस वर्चस्व की लड़ाई को देखते हुए अब कांग्रेस हाईकमान बेहद सख्त मूड में आ गया है।
नाराज और बागी रुख अपना रहे नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से कड़ा संदेश भेजा गया है कि यदि वे नहीं सुधरे, तो उन्हें पूरी तरह हाशिये पर धकेल दिया जाएगा।
⚡ चन्नी बनाम राजा वड़िंग: क्यों गहराया विवाद?
कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में संतुलन बनाने के लिए राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा और चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया था। लेकिन पार्टी के भीतर मची रार थमने का नाम नहीं ले रही है:
- मोरिंडा की गुप्त बैठक: हाल ही में पूर्व सीएम चन्नी ने मोरिंडा में अपने समर्थक नेताओं के साथ एक बड़ी बैठक की。 चन्नी के घर पर जुटे इन वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर राजा वड़िंग के नेतृत्व को चुनौती दी और हाल ही में की गई संगठनात्मक नियुक्तियों पर पुनर्विचार करने के लिए हाईकमान को एक हफ्ते का समय दे डाला।
- बैठकों से दूरी: इसके अलावा पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक से भी चन्नी नदारद रहे, जिसने आग में घी डालने का काम किया और पार्टी के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया।
🚫 टिकट की रेस से बाहर करने और अलग-थलग करने की चेतावनी
सूत्रों के मुताबिक, पिछले विधानसभा चुनाव (2022) में गुटबाजी के कारण सत्ता गंवा चुकी कांग्रेस इस बार कोई ढील देने के मूड में नहीं है। नाराज नेताओं को अनुशासित रहने की नसीहत देते हुए हाईकमान ने साफ कर दिया है:
- पब्लिक में बयानबाजी पर रोक: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं (जैसे कैप्टन संदीप संधू) ने साफ तौर पर कहा है कि अंदरूनी मतभेदों को सार्वजनिक मंचों पर उछालना बंद किया जाए और जो भी शिकायतें हैं, उन्हें पार्टी फोरम के भीतर ही सुलझाया जाए।
- टिकट कटने का खतरा: हाईकमान ने सख्त चेतावनी दी है कि जो भी नेता अनुशासन का उल्लंघन करेगा या समानांतर बैठकें करके पार्टी विरोधी गतिविधियों को हवा देगा, उसे आगामी विधानसभा चुनावों में टिकट की रेस से सीधे बाहर कर दिया जाएगा।
- हाशिये पर जाएंगे नेता: अनुशासनहीनता बर्दाश्त न करते हुए ऐसे नेताओं को सांगठनिक पदों से हटाकर पूरी तरह अलग-थलग (Isolate) कर दिया जाएगा।
🧐 क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?
पंजाब कांग्रेस में मची यह रार 2022 के विधानसभा चुनावों की यादें ताजा कर रही है, जब नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच के विवाद ने पूरी पार्टी को ले डूबा था। यही कारण है कि प्रभारी भूपेश बघेल और राजा वड़िंग जहां एक तरफ इस विवाद को सामान्य बताने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हाईकमान बागियों पर कड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बनाने में जुट गया है।


