प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार दिवसीय मध्य एशिया यात्रा को भारत की कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की यात्रा करेंगे, जिसके बाद 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
ताशकंद क्यों है भारत के लिए खास?
उज्बेकिस्तान भारत के लिए केवल एक साझेदार देश नहीं, बल्कि मध्य एशिया तक पहुंच की रणनीति का अहम केंद्र है। ताशकंद में पीएम मोदी की राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ बातचीत में व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य, तकनीक, शिक्षा और सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और उज्बेकिस्तान की बढ़ती नजदीकी से मध्य एशिया में नई आर्थिक और रणनीतिक संभावनाएं खुल सकती हैं।
इस यात्रा का ऐतिहासिक और भावनात्मक पहलू भी महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी के ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति से जुड़े स्थल पर जाने की योजना है। ताशकंद भारत के राजनीतिक इतिहास में शास्त्री जी की अंतिम यात्रा और 1966 के ताशकंद समझौते के कारण विशेष स्थान रखता है। ऐसे में उनकी स्मृति को श्रद्धांजलि भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों के बीच एक अलग संदेश भी दे सकती है।
पाकिस्तान की चिंता क्यों बढ़ सकती है?
भारत मध्य एशिया के देशों के साथ आतंकवाद और सुरक्षा सहयोग को लगातार मजबूत करना चाहता है। SCO मंच पर भी आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था भारत के प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। भारत की मध्य एशिया में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता पाकिस्तान के लिए असहज हो सकती है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा और कनेक्टिविटी की राजनीति में नई साझेदारियां बन रही हैं।
बिश्केक में बड़ी कूटनीतिक मुलाकातें
उज्बेकिस्तान के बाद पीएम मोदी बिश्केक पहुंचेंगे, जहां 26वें SCO शिखर सम्मेलन में भारत की प्राथमिकताएं सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर होंगी। सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मोदी की मुलाकात भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी SCO बैठक में शामिल होने की घोषणा हो चुकी है, जिससे यह मंच कई अहम वैश्विक नेताओं के संवाद का केंद्र बन सकता है।
BRICS से पहले कूटनीतिक तैयारी
यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत इसके बाद सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। मध्य एशिया से लेकर SCO और फिर BRICS तक लगातार उच्चस्तरीय बैठकों की श्रृंखला भारत को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर दे सकती है। कुल मिलाकर, मोदी का यह दौरा केवल दो देशों की यात्रा नहीं, बल्कि मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक पहुंच, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और वैश्विक कूटनीति में प्रभाव बढ़ाने की व्यापक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


