पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निर्वाचन आयोग ने पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों से अपने लिए अलग नाम और मुक्त चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा है।
क्या है पूरा विवाद?
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, टीएमसी में इस समय दो प्रतिद्वंद्वी समूह सामने आए हैं। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों पक्ष पार्टी पर अपना दावा जता रहे हैं। आयोग ने कहा कि इस विवाद पर चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत फैसला जरूरी है।
आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य अंतिम फैसला आने तक दोनों गुटों को समान स्थिति में रखना और उनके अधिकारों एवं हितों की रक्षा करना बताया गया है।
दोनों गुटों को क्या करना होगा?
आयोग के निर्देश के अनुसार, दोनों गुटों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपने पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने थे। प्रत्येक गुट को तीन नाम और तीन मुक्त चुनाव चिह्न प्राथमिकता के क्रम में सुझाने हैं। इसके बाद आयोग उपचुनाव के लिए प्रत्येक समूह को एक नाम और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।
इसका मतलब यह है कि अंतिम विवाद सुलझने तक दोनों गुट ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न के साथ उपचुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
आयोग के फैसले पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने इसे निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को रोकना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘देर रात जन्मदिन का तोहफा’ है। यह वेणुगोपाल का राजनीतिक आरोप है, आयोग के आदेश में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग ने पहले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े विवादों के मामलों की तरह टीएमसी के मामले में भी विपक्ष को नुकसान पहुंचाने वाला कदम उठाया है। कांग्रेस ने आयोग से टीएमसी के पारंपरिक चुनाव चिह्न को ममता बनर्जी के गुट को बहाल करने की मांग की है।
कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में संगठनात्मक विवाद का अंतिम फैसला किए जाने तक दोनों पक्षों को समान स्थिति में रखने की आवश्यकता बताई है।
अब निगाहें आयोग के आगे होने वाले फैसले पर हैं। फिलहाल उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को नई राजनीतिक पहचान और अलग चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरने की तैयारी करनी होगी।


