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    पीएम मोदी का इंडोनेशिया दौरा, चीन और पाकिस्तान की बढ़ी छटपटाहट

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से 11 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अपने छह दिवसीय हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) दौरे पर रवाना हो चुके हैं। इस महत्वपूर्ण यात्रा के पहले पड़ाव के रूप में पीएम मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के राजकीय दौरे पर हैं। व्यापक रणनीतिक भागीदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के तहत प्रधानमंत्री का यह चौथा इंडोनेशिया दौरा है। दोनों देशों के बीच मजबूत होते रक्षा और आर्थिक संबंधों ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और क्षेत्रीय विस्तारवादी नीति रखने वाले चीन की नींद उड़ा दी है।

    जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ होने वाली इस द्विपक्षीय वार्ता के रणनीतिक रूप से बेहद अहम और दूरगामी परिणाम होने वाले हैं:

    1. क्रिटिकल मिनरल (निकल डिप्लोमेसी) में चीन का एकाधिकार होगा खत्म

    भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग की एक सबसे बड़ी वजह क्रिटिकल मिनरल (Critical Minerals) की मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना है।

    • इंडोनेशिया के पास पूरी दुनिया का करीब 21 फीसदी निकल (Nickel) रिजर्व मौजूद है। इसके साथ ही यह कॉपर, बॉक्साइट और टिन के मामले में दुनिया के शीर्ष उत्पादकों में से एक है।
    • भारत अपने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग और स्वच्छ ऊर्जा बदलाव के लिए बड़े पैमाने पर इन खनिजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। अब तक इस क्षेत्र के डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग पर चीन का एकतरफा प्रभुत्व था। पीएम मोदी की इस ‘निकल डिप्लोमेसी’ के जरिए भारत सीधे इंडोनेशिया में रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग के जॉइंट वेंचर स्थापित कर चीनी कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ेगा।

    2. ब्रह्मोस मिसाइल डील: रक्षा क्षेत्र में नया मील का पत्थर

    फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा रणनीतिक खरीदार बनने की कगार पर है। इस दौरे के दौरान भारत में निर्मित ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की चरणबद्ध खरीद प्रणाली (Phased Procurement Plan) को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम दौर में है। इंडोनेशिया द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली को अपनाने से न केवल उसकी तटीय रक्षा क्षमता और मारक क्षमता मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत एक मजबूत रक्षा निर्यातक के रूप में उभरेगा।

    3. मलक्का स्ट्रेट (Malacca Strait) पर भारत की कड़ा पहरा

    भौगोलिक दृष्टि से इंडोनेशिया बेहद संवेदनशील जलमार्ग ‘मलक्का स्ट्रेट’ के मुहाने पर स्थित है। यह दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्ग है, जहां से चीन के अधिकांश मालवाहक और तेल टैंकर (Energy Supply) गुजरते हैं।

    • भारत ने अपनी सुरक्षा रणनीति को पुख्ता करते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ पर तेजी से काम शुरू किया है।
    • इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट (Aceh) और भारत के निकोबार प्रोजेक्ट की निकटता के कारण दोनों देशों के बीच बढ़ता समुद्री और नौसैनिक सहयोग हिंद महासागर में चीन की किसी भी आक्रामक गतिविधि को पूरी तरह नियंत्रित करने में सक्षम है। दोनों देशों का यह ‘मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस’ और संयुक्त नौसैनिक गश्त (CORPAT) चीन के लिए सबसे बड़ी छटपटाहट की वजह बना हुआ है।

    बहुआयामी सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव

    रक्षा और खनिज के अलावा, दोनों शीर्ष नेता स्वास्थ्य, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), स्पेस टेक्नोलॉजी और द्विपक्षीय व्यापार को साल 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने के रोडमैप पर चर्चा करेंगे। पीएम मोदी इस यात्रा के दौरान योग्याकार्ता में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रामबानन मंदिर परिसर (Prambanan Temple) भी जाएंगे, जो भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने अटूट सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों (Civilizational Depth) को दर्शाता है.

    जहाँ पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर अपनी खोई साख और कंगाली से जूझ रहा है, वहीं भारत ने इंडोनेशिया जैसे अहम रणनीतिक साझेदार को साधकर दक्षिण-पूर्व एशिया और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना परचम लहरा दिया है।

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