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    पाकिस्तान: क्वेटा के ऐतिहासिक गुरुद्वारे पर चला बुलडोजर, SGPC ने जताई नाराजगी, भारत से हस्तक्षेप की मांग

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को कथित तौर पर ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, गुरुद्वारे की इमारत को गिराकर वहां व्यावसायिक शॉपिंग प्लाजा बनाने की तैयारी की जा रही है। घटना के बाद सिख समुदाय में नाराजगी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने भी इसे गंभीर और चिंताजनक मामला बताते हुए पाकिस्तान सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

    गुरुद्वारे को लेकर क्या सामने आया?

    बलूचिस्तान सिख काउंसिल के अनुसार, क्वेटा में मौजूद गुरुद्वारा सिंह सभा की इमारत को करीब दो सप्ताह पहले एक निजी पक्ष ने कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया। काउंसिल के सदस्य सागर सिंह ने बताया कि इसी जमीन पर गुरुद्वारे के साथ एक स्कूल भी मौजूद था और दोनों इमारतों को गिराया गया। मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू किए जाने की बात सामने आई है।

    गुरुद्वारे की उम्र को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे करीब 200 साल पुराना बताया गया है, जबकि स्थानीय सिख प्रतिनिधियों और पुराने दस्तावेजों से जुड़े दावों में इसके निर्माण का समय 1930 के आसपास बताया गया है। इसलिए इसकी सटीक ऐतिहासिक आयु की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

    SGPC अध्यक्ष ने बताया सिख विरासत पर हमला

    SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मौजूद गुरुद्वारे केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि सिख समुदाय की धार्मिक पहचान, इतिहास और विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ऐतिहासिक धार्मिक स्थल को गिराकर वहां व्यावसायिक निर्माण करना सिख भावनाओं का अनादर है।

    धामी ने पाकिस्तान सरकार और संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्य तत्काल रोकने और गुरुद्वारा साहिब की संपत्ति सिख समुदाय को वापस सौंपने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

    भारत से कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग

    SGPC अध्यक्ष ने भारत के विदेश मंत्रालय से भी इस मामले को पाकिस्तान सरकार के सामने कूटनीतिक स्तर पर उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में मौजूद सिख विरासत से जुड़े स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

    भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी घटना पर आपत्ति जताते हुए विदेश मंत्रालय और अकाल तख्त से मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कथित ध्वस्तीकरण की जांच और वहां चल रहे व्यावसायिक निर्माण को रोकने की मांग की है।

    बलूचिस्तान में कितने गुरुद्वारे बचे?

    बलूचिस्तान सिख काउंसिल का दावा है कि क्षेत्र में कभी करीब 12 गुरुद्वारे थे, लेकिन अब केवल दो ही बचे हैं। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। यदि यह दावा सही है तो यह क्षेत्र में सिख धार्मिक विरासत के सिकुड़ते दायरे को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।

    पहले भी सामने आया था गुरुद्वारा तोड़े जाने का मामला

    क्वेटा की घटना ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फारूकाबाद में करीब 125 साल पुराने गुरुद्वारे को कथित तौर पर गिराए जाने को लेकर भी विवाद हुआ था। भारत ने उस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी और धार्मिक स्थल के संरक्षण की मांग की थी।

    क्वेटा मामले में अब नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार और संबंधित प्रशासन कथित ध्वस्तीकरण तथा व्यावसायिक निर्माण को लेकर क्या कार्रवाई करते हैं। साथ ही, गुरुद्वारे की जमीन के स्वामित्व और निर्माण की अनुमति से जुड़े दस्तावेज भी पूरे विवाद की तस्वीर स्पष्ट करने में अहम होंगे।

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