‘भारतीय हमले ने तोड़ी रीढ़’, ऑपरेशन सिंदूर पर पहली बार मसूद अजहर की चिट्ठियां आई सामने
आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय खुफिया और सैन्य कार्रवाई के चलते मसूद अजहर का पूरा नेटवर्क ध्वस्त हो चुका है। हाल ही में सामने आईं मसूद अजहर की कुछ गोपनीय चिट्ठियों ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारतीय सुरक्षा बलों की गुप्त सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने जैश-ए-मोहम्मद की रीढ़ पूरी तरह से तोड़ दी है।
चिट्ठियों में छलका मसूद अजहर का दर्द
सामने आए पत्रों में मसूद अजहर ने पहली बार यह स्वीकार किया है कि वह भारतीय हमलों के कारण पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। बहावलपुर स्थित जैश के मुख्य मरकज (मुख्यालय) और मस्जिद को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमलों और खुफिया ऑपरेशनों का जिक्र करते हुए अजहर ने लिखा है कि इस कार्रवाई में उसका “पूरा परिवार खत्म हो गया है।”
चिट्ठियों के अनुसार, भारत की इस सख्त और रणनीतिक कार्रवाई ने न केवल जैश के शीर्ष कमांडरों को मार गिराया, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क और हौसलों को पस्त कर दिया है। मसूद अजहर ने पत्रों में भारी लाचारी जताते हुए कहा है कि अब उनके पास न तो सुरक्षित ठिकाने बचे हैं और न ही पहले जैसी ताकत।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
सूत्रों के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों द्वारा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ चलाया गया एक अत्यंत गोपनीय और आक्रामक अभियान था। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य जैश-ए-मोहम्मद के वित्तीय स्रोतों, सुरक्षित ठिकानों और उसके शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना था।
- सटीक निशाना: पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों पर पिन-पॉइंट स्ट्राइक की गई।
- नेतृत्व का खात्मा: मसूद अजहर के करीबी रिश्तेदारों और संगठन को चलाने वाले मुख्य रणनीतिकारों को इस ऑपरेशन में ढेर कर दिया गया।
- बहावलपुर मरकज का पतन: जैश का वह गढ़, जहां से भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें रची जाती थीं, अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है।
पाकिस्तान के दावों की खुली पोल
यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान वैश्विक मंचों (जैसे FATF और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंच) पर हमेशा यह दावा करता रहा है कि मसूद अजहर लापता है या उसकी मौत हो चुकी है। लेकिन इन ताजा चिट्ठियों ने पाकिस्तान के पाखंड को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है। यह साफ हो गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की शह पर मसूद अजहर बहावलपुर में ही छिपा हुआ था और वहीं से अपना नेटवर्क चला रहा था।
मसूद अजहर का कुनबा साफ: अपनों की मौत का कबूलनामा
चिट्ठी में मसूद अजहर ने पहली बार बेहद लाचारी के साथ स्वीकार किया है कि भारत के मिसाइल हमले में उसका पूरा कुनबा तबाह हो चुका है। उसने अपने मारे गए सगे-संबंधियों की जो सूची दी है, वह इस प्रकार है:
- बड़ी बहन और जीजा (बहन के पति)
- उसका भतीजा और भतीजे की पत्नी
- उसकी भतीजी
- परिवार के 5 मासूम बच्चे
इसके अलावा, अजहर ने अपने सबसे करीबी दोस्त हुज़ैफ़ा का भी जिक्र किया है। उसने लिखा है कि इस हमले में हुज़ैफ़ा की मां और उसके दो अन्य साथी भी मारे गए हैं। यह कबूलनामा इस बात का पुख्ता सबूत है कि भारतीय हमले में जैश-ए-मोहम्मद के केवल कोर कमांडर ही नहीं, बल्कि उनका पूरा पारिवारिक और रणनीतिक नेटवर्क एक झटके में खत्म हो गया।
बहावलपुर मरकज का जमींदोज होना और आतंकियों में खौफ
पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित ‘मरकज जामिया मस्जिद सुभान अल्लाह’ जैश-ए-मोहम्मद का सबसे सुरक्षित किला और वैचारिक गढ़ माना जाता था। यहीं से भारत के खिलाफ जिहाद के नाम पर युवाओं का ब्रेनवॉश किया जाता था।
आतंकियों में खौफ: इस मरकज के पूरी तरह जमींदोज होने के बाद जैश के बचे-कुचे सदस्यों और कमांडरों में भारी खौफ का माहौल है। उन्हें समझ आ गया है कि अब पाकिस्तान की धरती पर भी वे भारत के राडार से सुरक्षित नहीं हैं। अजहर की चिट्ठी से साफ है कि संगठन के भीतर इस समय केवल डर और हताशा का माहौल है।
कमर टूटी: फंडिंग और नई भर्ती पर लगा ब्रेक
इस सटीक मिसाइल हमले ने न केवल जैश की लीडरशिप को खत्म किया, बल्कि उसके भविष्य के मंसूबों पर भी पानी फेर दिया है। मसूद अजहर ने चिट्ठी में दो सबसे महत्वपूर्ण बातें स्वीकार की हैं:
- घाटी में नई भर्ती ठप: भारत के इस आक्रामक रुख और जैश के शीर्ष नेतृत्व के सफाए के बाद कश्मीर घाटी में आतंकियों की नई भर्ती पर बहुत बुरा असर पड़ा है। स्थानीय युवाओं में अब इस संगठन से जुड़ने का खौफ साफ देखा जा सकता है।
- फंडिंग का संकट: जैश-ए-मोहम्मद का पूरा फाइनेंशियल नेटवर्क इस हमले के बाद बिखर गया है। अजहर ने खुद माना है कि संगठन को मिलने वाली फंडिंग अब बेहद कम हो गई है, जिससे बचे हुए आतंकियों को पालना और नए ऑपरेशन्स को अंजाम देना नामुमकिन होता जा रहा है।


