नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई वॉर ड्रामा सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ 1999 के कारगिल युद्ध और इसमें भारतीय वायु सेना (IAF) के ‘गोल्डन एरोज’ स्क्वाड्रन की साहसिक भूमिका को दिखाने के लिए जबरदस्त सुर्खियां बटोर रही है। शो में दिखाई गई कई ऐतिहासिक घटनाओं, विशेषकर तत्कालीन पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ (मनु ऋषि चड्ढा द्वारा अभिनीत) के किरदारों की असलियत को लेकर चर्चाएं गरम हैं। वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ न केवल भारतीय वायुसेना के शौर्य को सलाम करती है, बल्कि यह हालिया इतिहास की उन जटिल रणनीतिक और राजनीतिक घटनाओं को भी काफी हद तक सटीकता से पर्दे पर उतारती है।
क्या मुशर्रफ ने पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को सलामी नहीं दी थी?
सच: हां, यह ऐतिहासिक रूप से सच है। 1999 में जब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (अंजन श्रीवास्तव द्वारा अभिनीत) शांति वार्ता के लिए ऐतिहासिक बस यात्रा कर लाहौर पहुँचे थे, तो सैन्य प्रोटोकॉल के बावजूद पाकिस्तानी सेना के तीनों प्रमुखों (जिसमें मुशर्रफ शामिल थे) ने वाघा बॉर्डर पर पीएम वाजपेयी का स्वागत नहीं किया और न ही उन्हें सलामी (Salute) दी।
- इस अपमान के जवाब में, दो साल बाद 2001 के आगरा शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.वाई. टिपनीस ने भी राष्ट्रपति मुशर्रफ को औपचारिक सलामी देने से परहेज किया था।
क्या मुशर्रफ ने तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ को अंधेरे में रखा?
सच: इस मुद्दे पर दो अलग-अलग दावे मौजूद हैं:
- नवाज शरीफ का दावा: पूर्व पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ (विनय पाठक द्वारा अभिनीत) ने वर्षों तक यही स्टैंड रखा कि मुशर्रफ ने कारगिल घुसपैठ की साजिश उनसे और अपने कोर कमांडरों से छिपाकर रची थी। शरीफ के अनुसार, उन्हें इस बात की जानकारी तब मिली जब पीएम वाजपेयी ने उन्हें फोन कर बताया कि पाकिस्तानी नियमित सैनिक कारगिल में लड़ रहे हैं।
- मुशर्रफ का दावा: इसके उलट, परवेज मुशर्रफ ने हमेशा दावा किया कि नवाज शरीफ को ऑपरेशन की पूरी जानकारी थी और उन्होंने खुद सेना के अड्डों का दौरा कर समीक्षा की थी।
शिमला समझौते का उल्लंघन और घुसपैठ की साजिश
सच: सीरीज में दिखाया गया है कि 1972 के शिमला समझौते के तहत दोनों देश सर्दियों में बर्फीली चोटियों से अपनी-अपनी सेनाएं पीछे हटा लेते थे। मुशर्रफ ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर भारतीय चौकियों पर कब्जा करने की साजिश रची। 1999 की गर्मियों में जब भारतीय सैनिक वापस लौटे, तो वे पाकिस्तानी सैनिकों की घात का शिकार हुए।
‘चाइना टेप’ और R&AW द्वारा पाकिस्तान का पर्दाफाश
सच: सीरीज में दिखाया गया है कि मुशर्रफ जब बीजिंग दौरे पर थे, तब भारतीय खुफिया एजेंसी R&AW ने उनके और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अजीज के बीच फोन पर हुई गुप्त बातचीत को इंटरसेप्ट (रिकॉर्ड) कर लिया था। इस कॉल में दोनों ने स्वीकार किया था कि कश्मीर में लड़ रहे लोग ‘मुजाहिदीन’ नहीं बल्कि नियमित पाकिस्तानी सैनिक हैं। भारत ने इस रिकॉर्डिंग को दुनिया के सामने जारी कर पाकिस्तान के झूठ की पोल खोल दी थी।


