भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 46वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आगामी वर्षों के लिए अपनी सरकार का ‘विजन’ स्पष्ट कर दिया है। 6 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने दो बड़े और ऐतिहासिक सुधारों— समान नागरिक संहिता (UCC) और एक देश-एक चुनाव (One Nation, One Election) को अपना अगला मुख्य मिशन घोषित किया है।
इस संबोधन की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
समान नागरिक संहिता (UCC) पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माताओं का सपना एक ऐसे भारत का था जहाँ सभी नागरिकों के लिए समान कानून हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि UCC किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। पीएम ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जनता के बीच जाकर इसके फायदों के बारे में बताएं और किसी भी प्रकार के भ्रम को दूर करें।
‘एक देश-एक चुनाव’ की रणनीति
पीएम मोदी ने देश में बार-बार होने वाले चुनावों के कारण विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं और भारी खर्च का जिक्र किया। उन्होंने कहा:
- संसाधनों की बचत: एक साथ चुनाव होने से सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा और सुरक्षाबलों का समय बचेगा।
- निरंतर विकास: आदर्श आचार संहिता के बार-बार लागू होने से विकास की गति नहीं रुकेगी।
- लोकतांत्रिक मजबूती: यह सुधार भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
कार्यकर्ताओं के लिए ‘संकल्प’
स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री ने भाजपा की यात्रा को ‘अंत्योदय’ से ‘अमृत काल’ की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है क्योंकि इसने हमेशा ‘राष्ट्र प्रथम’ के मंत्र को सर्वोपरि रखा है। पीएम ने आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के रोडमैप पर चर्चा करते हुए कार्यकर्ताओं को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के लिए अभी से जुटने का निर्देश दिया।
विपक्षी दलों पर निशाना
बिना नाम लिए प्रधानमंत्री ने वंशवाद और भ्रष्टाचार की राजनीति करने वाले दलों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीति ‘तुष्टिकरण’ की नहीं, बल्कि ‘संतुष्टिकरण’ की है, जहाँ योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर पात्र व्यक्ति तक पहुँच रहा है।
यह संबोधन साफ संकेत देता है कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के अंतिम चरणों और भविष्य की योजनाओं में बड़े विधायी बदलावों के लिए तैयार है। UCC और ‘एक देश-एक चुनाव’ अब केवल चुनावी मुद्दे नहीं, बल्कि भाजपा के शासन के एजेंडे में सबसे ऊपर हैं।


