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    नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग, 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की भारी घेराबंदी

    नक्सलवाद के खिलाफ जारी निर्णायक जंग में सुरक्षाबलों को एक बड़ी मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक बढ़त मिली है। छत्तीसगढ़ और झारखंड के सीमावर्ती जंगलों में 3000 जवानों की भारी घेराबंदी के बीच ‘नक्सलियों के आखिरी बड़े कमांडर’ माने जाने वाले मिसिर बेसरा के सरेंडर की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    कौन है मिसिर बेसरा?

    मिसिर बेसरा उर्फ ‘सागर’ माओवादियों की सबसे शक्तिशाली इकाई, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) का सदस्य है। उसके सिर पर एक करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित है। वह नक्सली संगठन में रणनीतियां बनाने और बड़े हमलों को अंजाम देने वाला प्रमुख चेहरा रहा है। उसे संगठन के पुराने और बेहद प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है।

    3000 जवानों का ‘घेरा’

    सुरक्षाबलों ने मिसिर बेसरा को पकड़ने के लिए एक अभूतपूर्व ऑपरेशन शुरू किया है। सारंडा के घने जंगलों और कोल्हान क्षेत्र में करीब 3000 जवानों (CRPF, कोबरा और राज्य पुलिस) ने मोर्चा संभाल रखा है। सुरक्षाबलों ने उसके छिपने के संभावित ठिकानों को चारों तरफ से सील कर दिया है, जिससे रसद और सूचनाओं की आपूर्ति पूरी तरह कट गई है।

    बेटे की भावुक अपील: “बाबा, वापस आ जाओ”

    इस सैन्य घेराबंदी के बीच सबसे चर्चा का विषय मिसिर बेसरा के बेटे की अपील बनी हुई है। उसके बेटे ने एक वीडियो संदेश के जरिए अपने पिता से हथियार डालने और मुख्यधारा में लौटने की विनती की है। बेटे ने कहा कि उनके परिवार को उनकी जरूरत है और वे एक सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। उसने प्रशासन की ‘सरेंडर पॉलिसी’ का हवाला देते हुए अपने पिता को सुरक्षित वापसी का भरोसा दिलाया। जानकारों का मानना है कि जवानों की बंदूकों से ज्यादा, परिवार की यह भावुक अपील नक्सली कमांडर के इरादों को कमजोर कर सकती है।

    नक्सलवाद का ‘अंत’ की ओर कदम

    सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिसिर बेसरा पकड़ा जाता है या सरेंडर करता है, तो यह मध्य भारत में नक्सलवाद की कमर तोड़ने जैसा होगा। हाल के महीनों में कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने या गिरफ्तार होने के बाद बेसरा को संगठन की आखिरी बड़ी उम्मीद माना जा रहा था।

    प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि बेसरा आत्मसमर्पण करता है, तो उसे सरकार की पुनर्वास नीति का पूरा लाभ मिलेगा। अब देखना यह है कि एक करोड़ का इनामी यह नक्सली कमांडर अपनी विचारधारा को चुनता है या अपने बेटे की पुकार सुनकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होता है।

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