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जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी दोषी करार, हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामवतार जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद न्यायपालिका का एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला आया है। 6 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर पीठ ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के नेता अमित जोगी को दोषी करार दिया है।

हाईकोर्ट का कड़ा फैसला

जस्टिस की खंडपीठ ने अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश रचने का दोषी माना है। हाईकोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। इससे पहले रायपुर की एक विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जिसे जग्गी परिवार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में अन्य 28 आरोपियों की उम्रकैद की सजा को भी बरकरार रखा है, जिसमें कई पूर्व पुलिस अधिकारी और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

क्या था जग्गी हत्याकांड?

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की सरकार थी। आरोप था कि यह एक राजनीतिक हत्या थी, जिसका मकसद चुनावी प्रतिद्वंद्विता को खत्म करना था। मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी, जिसने अमित जोगी को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया था।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

अमित जोगी को मिली इस सजा ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

  1. जेसीसी (जे) का भविष्य: पार्टी के मुख्य चेहरे को सजा मिलने से संगठन के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
  2. विपक्ष का हमला: भाजपा और अन्य दलों ने इस फैसले को ‘सत्य की जीत’ बताया है।
  3. अगला कदम: अमित जोगी के वकीलों ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।

जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि “देर से ही सही, लेकिन न्याय की जीत हुई है।” यह फैसला राज्य में रसूखदारों के खिलाफ कानूनी जवाबदेही का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।

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