भारत सरकार देश में लागू पुराने ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ (Net Neutrality) नियमों की समीक्षा करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगर नियमों में बदलाव या छूट दी जाती है, तो रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) जैसी टेलीकॉम कंपनियां गेमिंग, हेल्थकेयर, ऑटोनॉमस व्हीकल्स और स्मार्ट फैक्ट्रियों जैसी विशिष्ट सेवाओं के लिए उपभोक्ताओं और कंपनियों से अलग-अलग स्पीड, कनेक्टिविटी और चार्जेस वसूल सकेंगी।
क्यों पड़ी नियमों की समीक्षा की जरूरत?
भारत में नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों को आधिकारिक तौर पर साल 2018 में अपनाया गया था। इसके तहत इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) के लिए बिना किसी भेदभाव के सभी कंटेंट और ऐप्स को समान स्पीड और एक्सेस देना अनिवार्य था।
हालांकि, 2022 में 5G सेवाओं की शुरुआत और हाल के वर्षों में 5G ‘नेटवर्क स्लाइसिंग’ (Network Slicing) तकनीक के आगमन के बाद पुराने नियम थोड़े सख्त और अप्रासंगिक नजर आने लगे हैं। सरकार ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से सिफारिशें मांगी हैं कि नेटवर्क स्लाइसिंग के नए दौर में नेट न्यूट्रैलिटी नियमों में क्या संशोधन या स्पष्टीकरण किए जाने चाहिए।
क्या है 5G ‘नेटवर्क स्लाइसिंग’?
5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक के जरिए टेलीकॉम कंपनियां एक ही भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर (नेटवर्क) पर कई वर्चुअल ‘स्लाइस’ बना सकती हैं।
- विशिष्ट सेवाओं के लिए खास स्लाइस: गेमिंग, टेली-मेडिसिन, ऑटोमैटिक गाड़ियाँ या इंडस्ट्री रोबोटिक्स जैसी सेवाओं के लिए उच्च स्पीड और बेहद कम लेटेंसी (अल्ट्रा-लो लेटेंसी) वाला एक समर्पित नेटवर्क स्लाइस दिया जा सकता है।
- सामान्य इंटरनेट अलग: आम उपभोक्ता जो सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग या ब्राउजिंग करते हैं, उनके लिए एक अलग स्लाइस रहेगा।
एयरटेल और जियो की तैयारी
- एयरटेल: एयरटेल ने हाल ही में अपने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए 5G स्लाइसिंग पर आधारित ‘प्रायोरिटी’ सर्विस पेश की है, जिसकी जांच फिलहाल DoT और TRAI कर रहे हैं।
- रिलायंस जियो: जियो ने भी घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में नेटवर्क क्षमता सुधारने और स्पेशल गेमिंग/अपलोड स्पीड स्लाइस देने के लिए 5G स्लाइसिंग के लचीले नियमों की मांग की है।
आम उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
- प्रीमियम इंटरनेट का विकल्प
- जो यूज़र्स ऑनलाइन गेमिंग, हाई-डेफिनिशन लाइव स्ट्रीमिंग या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गारंटीकृत स्पीड और कम लेटेंसी चाहते हैं, वे इसके लिए अलग से प्रीमियम प्लान चुन सकेंगे।
- समान इंटरनेट रहेगा सुरक्षित
- सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव के बावजूद बुनियादी इंटरनेट पूरी तरह मुफ्त और भेदभाव-रहित रहेगा। किसी खास वेबसाइट को ब्लॉक करना या प्राथमिकता के आधार पर सामान्य सर्फिंग को स्लो (थ्रॉटल) करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर और चीन जैसे देशों में पहले से ही 5G नेटवर्क स्लाइसिंग के आधार पर अलग-अलग प्लान पेश किए जा रहे हैं। भारत में इस कदम से टेलीकॉम सेक्टर के राजस्व में इजाफा होने और 5G इनोवेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


