पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने सियासी माहौल गरमा दिया है। शुक्रवार को प्रधान को एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया। खास बात यह रही कि गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान किया था। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी आमने-सामने आ गए।
राहुल गांधी ने लगाए राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा निष्पक्ष चुनाव में भरोसा नहीं करती और चुनावी मुकाबले को खत्म करने की कोशिश कर रही है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस इस कार्रवाई से डरने या झुकने वाली नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी गिरफ्तारी को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा और इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश बताया। कांग्रेस नेताओं ने खास तौर पर गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए, क्योंकि इससे पहले ही ममता बनर्जी ने प्रधान के समर्थन का एलान किया था।
ऋतब्रत बनर्जी ने राहुल को दिया जवाब
राहुल गांधी के बयान के करीब एक घंटे बाद ऋतब्रत बनर्जी ने पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस गुट ने ही मिलन प्रधान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। ऋतब्रत के मुताबिक, प्रधान के खिलाफ तीन हत्या के मामले लंबित हैं और चुनाव के दौरान लंबित वारंट को लागू करना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
ऋतब्रत ने यह भी कहा कि संभव है कि पश्चिम बंगाल कांग्रेस नेतृत्व ने राहुल गांधी को पूरे मामले की जानकारी नहीं दी हो। हालांकि, ये बातें ऋतब्रत और उनके राजनीतिक गुट के दावे हैं।
2007 के पुराने मामले में हुई गिरफ्तारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मिलन प्रधान की गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में लंबित वारंट के आधार पर हुई। पुलिस का कहना है कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित था और अदालत से उन्हें कोई कानूनी सुरक्षा हासिल नहीं थी। पुलिस ने कार्रवाई को चुनावी घटनाक्रम से जोड़ने से इनकार किया है।
ममता के समर्थन के बाद बदला समीकरण
नंदीग्राम में पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे मैदान में थीं। उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इसके कुछ ही घंटे बाद प्रधान की गिरफ्तारी हो गई, जिससे राजनीतिक विवाद और गहरा गया।
नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। फिलहाल मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बावजूद उनकी उम्मीदवारी स्वतः खत्म नहीं होती। चुनावी नियमों के तहत केवल गिरफ्तारी किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं बनाती; इसके लिए दोषसिद्धि और सजा से जुड़े कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने नंदीग्राम उपचुनाव को राज्य की राजनीति में फिर से केंद्र में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस, ममता बनर्जी का गुट और विपक्षी दल चुनावी मैदान में इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं।


