प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हो रही है। इसमें 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों के अलावा पर्यावरण विशेषज्ञ और भारत के न्यायिक अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं।
भारत के पर्यावरण प्रयासों का किया जिक्र
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। उन्होंने कहा कि देश का विकास अब केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी को भी इसमें शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा को भारत की ऊर्जा यात्रा का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि देश की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है। उन्होंने रूफटॉप सोलर, सोलर पंप और एलईडी बल्ब जैसी पहलों का भी उल्लेख किया।
हाइड्रोजन ट्रेन को बताया स्वच्छ परिवहन की दिशा में कदम
पीएम मोदी ने क्लीन मोबिलिटी के क्षेत्र में भारत की पहल का जिक्र करते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। यह ट्रेन जुलाई 2026 में जींद से सोनीपत के बीच शुरू की गई थी। प्रधानमंत्री के अनुसार, हाइड्रोजन आधारित परिवहन स्वच्छ और टिकाऊ मोबिलिटी की दिशा में एक नया चरण है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली इस ट्रेन में ईंधन से बिजली पैदा होती है और संचालन के दौरान मुख्य उप-उत्पाद के रूप में जलवाष्प निकलता है। ट्रेन को भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है।
सौर ऊर्जा से आगे बढ़ रहा क्लीन एनर्जी मिशन
पीएम मोदी ने कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा अभियान सिर्फ सौर ऊर्जा तक सीमित नहीं है। पिछले 12 वर्षों में देश की पवन ऊर्जा क्षमता तीन गुना हुई है, जबकि जलविद्युत क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के विकास और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल को भी स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का हिस्सा बताया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन दर वैश्विक औसत के आधे से भी कम है। उनके मुताबिक, भारत ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत किए गए लक्ष्यों को निर्धारित समय से पहले हासिल किया है।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर
मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी तय करते समय अलग-अलग देशों के प्रति व्यक्ति उत्सर्जन और ऐतिहासिक योगदान को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने भारत की पारंपरिक पर्यावरणीय सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आधुनिक तकनीक और अपनी पुरानी पर्यावरणीय मान्यताओं को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
दो दिवसीय सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय शासन, जैव विविधता, टिकाऊ ऊर्जा और पर्यावरण न्याय जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के न्यायिक और संस्थागत अनुभवों को साझा कर पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करना है।


