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    MP: कैबिनेट से UCC मसौदे को मंजूरी, निकाह हलाला होगा अपराध; जानें और क्या हैं प्रावधान

    ​मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में रविवार (19 जुलाई 2026) को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल के नजदीक जगदीशपुर में आयोजित एक विशेष कैबिनेट बैठक के दौरान ‘मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026’ के मसौदे (ड्राफ्ट) को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई है।

    ​इस मंजूरी के बाद, अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश देश का ऐसा दूसरा राज्य बनने जा रहा है, जो यूसीसी लागू करने की राह पर है।

    ​9.5 लाख से अधिक सुझावों के बाद तैयार हुआ ड्राफ्ट

    ​सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा करने और जनता से मिले 9.58 लाख से अधिक सुझावों का विश्लेषण करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है। इस व्यापक ड्राफ्ट में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं करता, बल्कि ‘एक देश, एक कानून’ की भावना के साथ सभी नागरिकों को समान अधिकार देने के लिए लाया जा रहा है।

    ​यूसीसी लागू होने से क्या-क्या बदलने वाला है?

    ​मध्य प्रदेश के इस नए कानून में महिलाओं के अधिकारों, विवाह की प्रथाओं और संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर कई बड़े और क्रांतिकारी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं:

    • निकाह हलाला और बहुविवाह पर रोक: नए कानून के तहत निकाह हलाला, इद्दत और बहुविवाह (एक से अधिक शादी) जैसी प्रथाओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। मसौदे के अनुसार, निकाह हलाला जैसी कुप्रथा को एक गंभीर और दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
    • लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण: यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसका जिला रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा। संबंध समाप्त होने पर भी इसकी लिखित सूचना देनी होगी। पंजीकरण न कराने पर 3 महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। इसके अतिरिक्त, लिव-इन में रहने वाले जोड़ों की जानकारी उनके माता-पिता को दी जाएगी और स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी इसका रिकॉर्ड रहेगा।
    • शादी का पंजीकरण अनिवार्य: सभी धर्मों के लोगों के लिए शादी का कानूनी रूप से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है।
    • उत्तराधिकार और संपत्ति के नियम में बदलाव: संपत्ति के बंटवारे में अब बेटों के साथ-साथ बेटियों को भी बराबर का हक मिलेगा। इसके अलावा, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में माता के साथ-साथ ‘पिता’ को भी कानूनी वारिस माना गया है और उन्हें भी हिस्सा मिलेगा।
    • लिव-इन पार्टनर को भरण-पोषण का हक: अगर कोई पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़ देता है, तो वह महिला अदालत के जरिए उससे गुजारा भत्ता (भरण-पोषण) पाने की हकदार होगी।

    ​आदिवासी समुदाय को दायरे से बाहर रखा गया

    ​मध्य प्रदेश की जनसांख्यिकी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। यह समान नागरिक संहिता (UCC) राज्य की लगभग 21% आदिवासी (अनुसूचित जनजाति – ST) आबादी पर लागू नहीं होगी। उनकी पारंपरिक प्रथाओं, स्थानीय रूढ़ियों और संवैधानिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने की सिफारिश को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया है। 

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