अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब बेहद गरमा गया है। इस विषय पर देशव्यापी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस पार्टी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साझा तौर पर प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में कांग्रेस नेतृत्व ने आरोप लगाया है कि देश-विदेश से भगवान राम के दर्शन करने आ रहे करोड़ों श्रद्धालु आज खुद को बेहद ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उनकी आस्था और गाढ़ी कमाई से दिए गए दान का दुरुपयोग हुआ है।
‘श्रद्धालुओं की आस्था के साथ बड़ा धोखा’
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां और चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। पत्र में तीखा हमला बोलते हुए लिखा गया है:
“यह बात जगजाहिर है कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य आरएसएस (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और उनसे जुड़े संगठनों से ताल्लुक रखते हैं। इस ट्रस्ट के बदनाम पूर्व पदाधिकारी भी आपके करीबी सहयोगी रहे हैं। ऐसे में आस्था से जुड़े इस इतने बड़े गंभीर अपराध पर सरकार की चुप्पी बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। जवाबदेही तय करना और श्रद्धालुओं के नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना सरकार का संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य है।”
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के सामने रखीं 3 बड़ी मांगें
इस पत्र के माध्यम से कांग्रेस पार्टी ने पूरे मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें रखी हैं:
- सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच: इस पूरे घोटाले और चढ़ावा चोरी के पीछे छिपे वास्तविक अपराधियों को बेनकाब करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष वित्तीय जांच (Financial Investigation) शुरू कराई जाए।
- ट्रस्ट के खाते सार्वजनिक किए जाएं: जांच के जो भी नतीजे सामने आएं, उन्हें और राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूरे ऑडिटेड खातों (Accounts) को पूरी तरह से सार्वजनिक किया जाए, ताकि देश के हर श्रद्धालु को यह स्पष्ट पता चल सके कि उनके द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया है।
- कड़ी कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही: जो भी लोग इस गंभीर वित्तीय हेराफेरी और चोरी के लिए सीधे या परोक्ष रूप से जिम्मेदार पाए जाएं, उनके रसूख, राजनीतिक पद या प्रभाव की परवाह किए बिना उन्हें तत्काल पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर जवाबदेही तय की जाए।
इस बीच, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी संसद की लोक लेखा समिति (PAC) के प्रमुख के तौर पर इस विषय को गंभीरता से उठाया है। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने यूपी के विभिन्न शहरों में ‘सद्बुद्धि पदयात्रा’ निकालकर सरकार और ट्रस्ट के खिलाफ उग्र प्रदर्शन भी किया है। विपक्ष का साफ तौर पर कहना है कि जब तक इस पवित्र स्थान की पवित्रता और पारदर्शिता बहाल नहीं होती, उनका यह विरोध थमेगा नहीं।


