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    सप्ताह के पहले दिन बाजार खुलते ही धड़ाम, पश्चिम एशिया में युद्ध का असर

    पश्चिम एशिया में गहराए ताजा सैन्य संकट का सीधा और बड़ा असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है। अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर की गई बमबारी और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों के साथ-साथ घरेलू निवेशक भी घबरा गए, जिससे बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।

    सेंसेक्स और निफ्टी का हाल (शुरुआती आंकड़े)

    सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही लाल निशान पर आ गया:

    • सेंसेक्स (Sensex): बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 600 से 650 अंक तक टूट गया। गिरावट के साथ यह सूचकांक 77,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।
    • निफ्टी (Nifty): नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स भी करीब 150 से 180 अंक की गिरावट के साथ 24,030-24,040 के स्तर पर आ गया।
    • मार्केट कैप को नुकसान: इस शुरुआती बिकवाली के कारण बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन (निवेशकों की संपत्ति) करीब ₹2 लाख करोड़ घटकर 479 लाख करोड़ रुपये रह गया।

    बाजार गिरने की मुख्य वजहें

    1. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल: पश्चिम एशिया संकट के कारण ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में 3.5% से अधिक की तेजी देखी गई, जिससे ब्रेंट क्रूड ₹80 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की ओर अग्रसर हुआ। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय बाजार की धारणा पर पड़ता है।
    2. वैश्विक बाजारों का दबाव: एशियाई बाजारों में भारी मंदी का रुख रहा। जापान का निक्केई 1.6% गिर गया, जबकि दक्षिण कोरिया का सूचकांक कॉस्पी (KOSPI) तो 6% से भी ज्यादा टूट गया। अमेरिकी शेयर बाजार वायदा (Dow Futures) भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
    3. रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 0.4% की गिरावट के साथ 95.70 के स्तर पर खुला।

    कौन से सेक्टर टूटे और किन्होंने संभाला?

    • टॉप लूजर्स (गिरावट वाले शेयर): सबसे ज्यादा मार मेटल और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों पर पड़ी। इंडिगो (InterGlobe Aviation) में करीब 2.8% की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। इसके अलावा टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयर भारी दबाव में रहे।
    • टॉप गेनर्स (बढ़त वाले शेयर): इस हाहाकार के बीच डिफेंसिव माने जाने वाले आईटी (IT) और फार्मा सेक्टर ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की। टीसीएस (TCS), एचसीएल टेक (HCL Tech) और एनटीपीसी (NTPC) के शेयर हरे निशान (तेजी) के साथ कारोबार कर रहे थे।

    विशेषज्ञों की राय: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना हुआ है, तब तक भारतीय बाजारों के लिए बहुत अधिक चिंता की बात नहीं है। हालांकि, अगर अमेरिका-ईरान का यह सीधे सैन्य टकराव लंबा खिंचता है या सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित होती है, तो आने वाले दिनों में और बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।

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