महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच अब ओबीसी समुदाय के कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में मनोज जारांगे के आंदोलन के विरोध में ओबीसी कार्यकर्ताओं ने जवाबी भूख हड़ताल शुरू की। हालांकि, सोमवार को पुलिस ने चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कार्रवाई के पीछे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और इलाके में तनाव बढ़ने की आशंका को वजह बताया।
जारांगे के आंदोलन के पास शुरू हुआ प्रदर्शन
ओबीसी कार्यकर्ताओं ने रविवार को जारांगे के आंदोलन स्थल से करीब 400 मीटर दूर सोनिया नगर इलाके में भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रदर्शन में मंगेश ससाने, विट्ठल तलेकर, बाबासाहेब बतुले और सतीश कुलाल शामिल थे। उनका कहना था कि मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी से आरक्षण देने की मांग से मौजूदा ओबीसी आरक्षण के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
पुलिस ने चारों को हिरासत में लिया
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी। अधिकारियों ने आशंका जताई कि दोनों पक्षों के आंदोलन स्थल पास होने से तनाव बढ़ सकता है और यातायात भी प्रभावित हो सकता है। पुलिस ने यह भी कहा कि जिस जगह पर ओबीसी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे, उसके इस्तेमाल के लिए ग्राम पंचायत या जमीन मालिक की अनुमति उनके पास नहीं थी। इसके बाद चारों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
ओबीसी कार्यकर्ता सरकार पर लगा रहे पक्षपात का आरोप
मंगेश ससाने ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मराठा आंदोलन को विशेष तवज्जो दे रही है और इससे ओबीसी समुदाय के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि ओबीसी समुदाय को अपने संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण में हिस्सेदारी की रक्षा के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
10वें दिन भी जारी है जारांगे का अनशन
दूसरी ओर, मनोज जारांगे का अनिश्चितकालीन अनशन सोमवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गया। वह मराठा समुदाय के पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र के जरिए ओबीसी आरक्षण का लाभ देने समेत कई मांगों पर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांगों में हैदराबाद और सतारा के गजट रिकॉर्ड को लागू करना भी शामिल है।
कुनबी समुदाय पहले से ओबीसी श्रेणी में शामिल है। ऐसे में मराठा समुदाय के पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र देने की मांग ने महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर मराठा और ओबीसी समुदायों के बीच नई राजनीतिक और सामाजिक खींचतान पैदा कर दी है।
जालना में एक ही क्षेत्र में आमने-सामने आए दोनों आंदोलनों के चलते प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ गई है।


