महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता दिख रहा है। शिवसेना (यूबीटी) यानी उद्धव ठाकरे गुट में एक बार फिर बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से करीब 6 से 7 सांसद पाला बदलकर उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। इन अटकलों को हवा तब मिली जब कई सांसदों के मोबाइल फोन अचानक बंद हो गए और उनसे संपर्क टूट गया।
बगावत की अटकलें और मुख्य वजहें
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे की पार्टी के कई सांसद इस समय मुंबई से दूर दिल्ली पहुंच चुके हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अपना एक अलग गुट बनाने की अनुमति मांग सकते हैं, जिसके बाद इस गुट का विलय शिंदे गुट में कर दिया जाएगा।
सांसदों की इस नाराजगी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें सामने आ रही हैं:
- नेतृत्व से दूरी: नाराज सांसदों की शिकायत है कि उद्धव ठाकरे से मिलने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। बिल्कुल ऐसी ही शिकायतें 2022 में विधायकों की बगावत के वक्त भी आई थीं।
- क्षेत्र के विकास के लिए फंड: शिंदे गुट और सत्तारूढ़ गठबंधन की तरफ से इन सांसदों को उनके संसदीय क्षेत्रों के विकास के लिए भारी-भरकम फंड और भविष्य (2029) में फिर से टिकट का आश्वासन मिलने की खबरें हैं।
संजय राउत का ’15-15 करोड़’ वाला सनसनीखेज दावा
इन सब अटकलों के बीच, उद्धव ठाकरे के सबसे करीबी और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद चौंकाने वाला और तीखा पोस्ट किया है। संजय राउत ने लिखा, “अपना सपना मनी..मनी..! यह बेहद चौंकाने वाला और घृणित है कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए आज रात ही 15-15 करोड़ रुपये की एडवांस रकम की पेशकश की जा रही है।”
हालांकि, राउत और अनिल देसाई जैसे सीनियर नेताओं ने आधिकारिक तौर पर बगावत की खबरों को खारिज किया है। राउत का दावा है कि कुछ दिन पहले हुई बैठक में सभी 9 सांसद (4 व्यक्तिगत रूप से और 5 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) मौजूद थे और सभी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अपनी पूरी निष्ठा जताई है। उन्होंने विपक्ष पर ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जरिए पार्टी तोड़ने की कोशिश करने और केंद्रीय एजेंसियों का डर दिखाने का आरोप लगाया।
उद्धव ठाकरे ने संभाली कमान
पार्टी में संभावित टूट और संकट को देखते हुए खुद उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे ने मोर्चा संभाल लिया है। ठाकरे गुट ने दिल्ली में अपने संसदीय दल की एक आपात बैठक बुलाई है ताकि नाराज और संपर्क से बाहर चल रहे सांसदों को मनाया जा सके और इस संकट को टाला जा सके। दूसरी तरफ, शिंदे गुट के नेताओं का कहना है कि अगर कोई बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर चलकर उनके साथ आना चाहता है, तो उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं।


