भारतीय क्रिकेट के 15 वर्षीय सनसनी वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा में हैं। हालांकि, हाल ही में आगामी दिलीप ट्रॉफी 2026 (Duleep Trophy) के लिए ईस्ट ज़ोन (East Zone) की टीम में उन्हें उपकप्तान (Vice-Captain) नियुक्त किए जाने के चयनकर्ताओं के फैसले ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। दिग्गज क्रिकेट कमेंटेटर और विश्लेषक हर्षा भोगले ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए चयनकर्ताओं की सोच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हर्षा भोगले का तीखा हमला: ‘यह फैसला समझ से परे है’
हर्षा भोगले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए लिखा कि 15 साल के उभरते हुए खिलाड़ी पर इस तरह का प्रशासनिक दबाव डालना उसके विकास के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
भोगले ने कहा, “15 साल के बच्चे को फर्स्ट-क्लास टूर्नामेंट में उपकप्तान बनाने के पीछे चयनकर्ताओं की आखिर क्या सोच है? वैभव बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और इस उम्र में उन्हें सिर्फ अपने खेल, अपनी तकनीक और बल्लेबाजी का आनंद लेने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि कप्तानी या उपकप्तानी की रणनीति पर।”
भोगले का मानना है कि इतनी कम उम्र में उपकप्तानी का अतिरिक्त बोझ देने से खिलाड़ी के स्वाभाविक खेल पर असर पड़ सकता है। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट (लाल गेंद का क्रिकेट) में सीनियर खिलाड़ियों के बीच एक किशोर को नेतृत्व की जिम्मेदारी देना तर्कसंगत नहीं दिखता।
क्यों चर्चा में हैं वैभव सूर्यवंशी?
बिहार के समस्तीपुर जिले से आने वाले वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से भारतीय घरेलू क्रिकेट और अंडर-19 स्तर पर तहलका मचाया है।
- आईपीएल और युवा टेस्ट में रिकॉर्ड: हाल ही में आईपीएल और भारत की अंडर-19 टीम के लिए खेलते हुए वैभव ने कई ताबड़तोड़ शतक जड़े हैं।
- दिलीप ट्रॉफी में चयन: उनके शानदार फॉर्म को देखते हुए ईस्ट ज़ोन की टीम में उन्हें जगह दी गई, लेकिन उन्हें सीधे उपकप्तानी सौंप दिए जाने से क्रिकेट जगत दो धड़ों में बंट गया है।
चयनकर्ताओं के फैसले पर बंटी क्रिकेट बिरादरी
जहां एक तरफ हर्षा भोगले, पूर्व क्रिकेटरों और विश्लेषकों का मानना है कि वैभव को कप्तानी के तनाव से दूर रखकर केवल एक शुद्ध बल्लेबाज के रूप में तैयार किया जाना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ चयनकर्ताओं का तर्क है कि इतनी कम उम्र में नेतृत्व का अनुभव देने से खिलाड़ी में निर्णय लेने की क्षमता और परिपक्वता तेजी से विकसित होगी। फिलहाल, हर्षा भोगले के इस बयान ने घरेलू क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों पर बढ़ते दबाव और कप्तानी के मानदंडों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।


