कर्नाटक की राजनीति में इस समय भारी हलचल है और मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस चरम पर पहुंच गया है। दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ हुई मैराथन बैठकों के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज (28 मई, 2026) अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।
नेतृत्व परिवर्तन का पूरा घटनाक्रम
- इस्तीफे की संभावना: कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक आर.वी. देशपांडे के अनुसार, सिद्धारमैया ने आलाकमान के फैसले का सम्मान करते हुए इस्तीफा देने का मन बना लिया है।
- राज्यपाल का मुंबई दौरा: सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा था, लेकिन इसी बीच खबर आई कि राज्यपाल बुधवार रात करीब 10:30 बजे पारिवारिक आपातकाल (Family Emergency) के कारण अचानक मुंबई के लिए रवाना हो गए। 27-28 मई 2026 के दौरान राज्यपाल मुंबई और इंदौर/उज्जैन के दौरे पर रहेंगे।
- कैबिनेट की ब्रेकफास्ट मीटिंग: सिद्धारमैया ने आज सुबह अपने आवास पर सभी मंत्रियों और डी.के. शिवकुमार के लिए एक ब्रेकफास्ट मीटिंग रखी है, जिसके बाद वह अपने फैसले की आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं।
- दिल्ली का दखल: रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिद्धारमैया को राज्यसभा सीट और केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी का प्रस्ताव देकर डी.के. शिवकुमार के लिए रास्ता छोड़ने को कहा है।
सिद्धारमैया बनाम डी.के. शिवकुमार: शक्ति संतुलन
2023 में जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तभी से दोनों नेताओं के बीच ‘ढाई-ढाई साल’ के पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चाएं थीं। अब सरकार के 3 साल पूरे होने पर आलाकमान इस समझौते को लागू करता दिख रहा है।
| नेता | वर्तमान पद | राजनीतिक प्रभाव | भावी भूमिका (संभावित) |
| सिद्धारमैया | मुख्यमंत्री | अहिंदा (AHINDA – अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, दलित) समुदायों के बड़े नेता | राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका |
| डी.के. शिवकुमार | उप-मुख्यमंत्री | वोक्कालिगा समुदाय के मजबूत नेता, संकटमोचक और कुशल संगठनकर्ता | कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री |
आगे क्या होगा?
कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि अभी विधायक दल की बैठक नहीं बुलाई गई है और अंतिम फैसला लोकतांत्रिक तरीके से होगा। वहीं, डी.के. शिवकुमार के समर्थक बेंगलुरु में मिठाइयां बांटकर जश्न मना रहे हैं। विपक्ष (BJP) का दावा है कि इस अंदरूनी कलह के कारण राज्य में मध्यावधि चुनाव (Mid-term polls) की नौबत आ सकती है।


