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    भारतीय मिसाइलों की दुनिया में मांग, रक्षा निर्यात ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर को पार

    पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा नीतियों और विनिर्माण क्षमता में जो अभूतपूर्व बदलाव किया है, उसका नतीजा अब दुनिया के सामने है। कभी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों (Importers) में शुमार रहने वाला भारत, आज एक प्रमुख रक्षा निर्यातक (Exporter) बनकर उभर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 25,000 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, जो इस बात का गवाह है कि भारतीय मिसाइलें और सैन्य उपकरण अब दुनिया की जरूरत बन रहे हैं।

    भारतीय मिसाइलों की दुनिया में क्यों है भारी मांग?

    वैश्विक स्तर पर भारतीय हथियारों, विशेषकर मिसाइल प्रणालियों की मांग बढ़ने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:

    1. लागत प्रभावी और विश्वसनीय (Cost-Effective & Reliable): पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका या यूरोप) की मिसाइलों की तुलना में भारतीय मिसाइल प्रणालियां अत्यधिक आधुनिक होने के साथ-साथ काफी किफायती हैं।
    2. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions): दक्षिण-चीन सागर में चीन के बढ़ते आक्रामक रुख और पूर्वी यूरोप व पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के कारण कई छोटे और मध्यम आय वाले देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए विश्वसनीय रक्षा साझेदार ढूंढ रहे हैं। भारत बिना किसी राजनीतिक शर्त के इन देशों को मजबूत विकल्प दे रहा है।
    3. ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता: रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने से उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में भारी सुधार हुआ है।

    रक्षा निर्यात के मुख्य ‘सुपरस्टार’: किसकी कितनी है मांग?

    भारत मुख्य रूप से तीन स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के दम पर वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी धाक जमा रहा है:

    ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos)

    यह भारत के रक्षा निर्यात का सबसे बड़ा चेहरा है। ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज (Mach 2.8) उड़ने वाली इस मिसाइल को रोक पाना दुनिया के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद मुश्किल है।

    • प्रमुख खरीदार: फिलीपींस ने अपनी नौसेना के लिए $375 मिलियन का सौदा किया था, जिसकी डिलीवरी शुरू हो चुकी है।
    • बढ़ती मांग: वियतनाम, इंडोनेशिया, और कई दक्षिण-पूर्व एशियाई व खाड़ी देश ब्रह्मोस के तटीय रक्षा (Coastal Defense) और हवाई संस्करणों को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

    आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (Akash)

    कम दूरी की यह सतह से हवा में मार करने वाली (SAM) मिसाइल प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है।

    • प्रमुख खरीदार: आर्मेनिया ने भारत के साथ करोड़ों डॉलर का सौदा कर आकाश सिस्टम को अपनी सेना में शामिल किया है।
    • बढ़ती मांग: इसके अलावा अफ्रीकी देश (जैसे मिस्र, नाइजीरिया) और कुछ दक्षिण-अमेरिकी देश अपने हवाई क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए आकाश मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए बातचीत कर रहे हैं।

    अस्त्र मिसाइल (Astra – BVR)

    हवा से हवा में मार करने वाली ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (BVR) अस्त्र मिसाइल ने भी वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। सुखोई-30MKI और तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से दागी जाने वाली यह मिसाइल पश्चिमी देशों की महंगी मिसाइलों को सीधी टक्कर दे रही है।

    वैश्विक बाजारों में भारत का बढ़ता दायरा

    भारत का रक्षा निर्यात अब केवल कुछ पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार कई महाद्वीपों में हो चुका है:

    • दक्षिण-पूर्व एशिया (East Asia): चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया जैसे देश भारत से मिसाइलें और हल्के लड़ाकू विमान (Tejas) खरीदने की रेस में हैं।
    • यूरोप (Europe): आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच तनाव के बाद आर्मेनिया भारतीय पिनाका रॉकेट सिस्टम, एंटी-टैंक मिसाइलों और आकाश सिस्टम का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है।
    • दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका: इन क्षेत्रों के देश कम बजट में बेहतरीन सैन्य तकनीक के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। मिसाइलों के अलावा, भारत निर्मित बुलेटप्रूफ जैकेट, रडार सिस्टम, सिमुलेटर और बख्तरबंद वाहनों की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

    भारत का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में अपने वार्षिक रक्षा निर्यात को 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है, और जिस गति से भारतीय मिसाइलों की मांग बढ़ रही है, यह लक्ष्य दूर नहीं लगता।

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