नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने स्पष्ट किया है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ में पीछे नहीं छूटा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन भले ही बड़े AI मॉडल (LLM) बनाने और एडवांस्ड चिप्स में आगे हों, लेकिन एप्लीकेशन और प्रैक्टिकल यूज के क्षेत्र में भारत के पास इतिहास रचने का पूरा अवसर है।
अमिताभ कांत के वक्तव्य के मुख्य बिंदु
- वैश्विक डेटा में 22% हिस्सेदारी: भारत दुनिया के कुल डेटा का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करेगा। AI मॉडल्स को प्रशिक्षित करने और सटीक एप्लीकेशन विकसित करने के लिए डेटा सबसे अहम ईंधन है।
- 30% स्किल्ड टैलेंट का योगदान: दुनिया भर के कुल स्किल्ड AI इंजीनियर्स, डेटा साइंटिस्ट्स और टेक प्रोफेश्नल्स में से करीब 30 प्रतिशत टैलेंट अकेला भारत दे सकता है।
- 200 अरब डॉलर का डेटा सेंटर निवेश: देश में लगभग 200 अरब डॉलर का निवेश डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में आने वाला है, जिससे डेटा प्रोसेसिंग और लोकल कंप्यूटिंग को भारी बढ़ावा मिलेगा।
- ग्लोबल टैलेंट का भारत रुख: अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों से कई AI विशेषज्ञ भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) से जुड़ने के लिए लौट रहे हैं।
- एप्लीकेशन-ड्रिवन AI पर फोकस: भारत को बड़े फाउंडेशनल मॉडल बनाने की होड़ में उलझने के बजाय कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल (AI Applications) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- रोजगार और री-स्किलिंग: AI से नौकरियों के खतरे पर उन्होंने कहा कि हर नई तकनीक पुरानी से ज्यादा अवसर लाती है। इसके लिए भारतीय शिक्षा पाठ्यक्रम और स्किलिंग सिस्टम में समय रहते बदलाव की आवश्यकता है।


