कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने गाजा में जारी संघर्ष और मानवीय संकट को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक समाचार पत्र में लिखे अपने लेख के जरिए उन्होंने इजरायल की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की और गाजा संकट पर भारत सरकार की “निरंतर चुप्पी” को नैतिक और राष्ट्रीय हित दोनों ही दृष्टिकोण से समझ से परे बताया है।
‘नैतिकता और राष्ट्रीय हित के खिलाफ है चुप्पी’
सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा में इजराइली सेना द्वारा बड़े पैमाने पर तबाही और नरसंहार को अंजाम दिया जा रहा है, जिसे लेकर पूरी दुनिया में आक्रोश है। ऐसे समय में मोदी सरकार का मौन बने रहना बेहद निंदनीय है। उन्होंने जोर देकर कहा, “इस चुप्पी को न तो तार्किक आधार पर और न ही नैतिक आधार पर उचित ठहराया जा सकता है।” उनका मानना है कि भारत की वर्तमान विदेश नीति मानवीय संवेदनाओं और देश के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ जा रही है।
पुराने और ऐतिहासिक सहयोगियों से बढ़ा फासला
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की इस नीति के कारण भारत अपने पारंपरिक और ऐतिहासिक सहयोगियों से दूर होता जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि वर्तमान विदेश नीति ने फिलिस्तीन, ईरान और व्यापक मध्य पूर्व (Middle East) में भारत के पुराने मित्रों को हमसे अलग-थलग कर दिया है।
सोनिया गांधी के मुताबिक, भारत तेजी से इजरायल के रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र की ओर झुक रहा है, जबकि इसके विपरीत दुनिया के अधिकांश देश अब इजरायल के इस आक्रामक रुख से दूरी बना रहे हैं।
मासूम बच्चों की मौत पर जताया गहरा दुख
अपने लेख में सोनिया गांधी ने गाजा में बच्चों को निशाना बनाए जाने की दर्दनाक स्थिति का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले आयोग के हवाले से बताया कि गाजा में अब तक कम से कम 20 हजार मासूम बच्चों की जान जा चुकी है और 44 हजार से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों और अस्पतालों को मलबे में तब्दील करना और बच्चों की इस तरह हत्या करना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
“गाजा और पश्चिमी तट में मानवीय गरिमा का खुलेआम चीरहरण हो रहा है, लेकिन वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के इस घोर उल्लंघन पर हमारा देश मूकदर्शक बना हुआ है।”
कांग्रेस की मांग: स्पष्ट और मुखर रुख अपनाए भारत
सोनिया गांधी ने मांग की है कि भारत को अपने पुराने गौरवशाली इतिहास और विरासत को याद करते हुए फिलिस्तीनी लोगों के समर्थन में खुलकर और स्पष्ट रूप से आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कूटनीतिक मामला नहीं है, बल्कि मानवता की रक्षा का सवाल है, जहां भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश को आगे आकर नेतृत्व दिखाना चाहिए।


