बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में आज एक बार फिर इतिहास रचा गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक-दूसरे का हाथ थामकर वैश्विक राजनीति को एक नया संदेश देने की कोशिश की। लगभग एक दशक के बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा है, जिसे ट्रंप ने “अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन” करार दिया है।
ट्रंप ने की जिनपिंग की तारीफ, बताया ‘महान नेता’
राजकीय स्वागत समारोह के बाद द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत करते हुए ट्रंप ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग को “असाधारण विशिष्टता वाला महान नेता” और अपना “मित्र” बताया। ट्रंप ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके व्यक्तिगत तालमेल से अमेरिका और चीन के संबंध “पहले से कहीं बेहतर” होंगे। उन्होंने जिनपिंग से चीनी बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए और अधिक खोलने का आग्रह किया, ताकि अमेरिकी उद्योगपति चीन के विकास में अपनी ‘जादुई’ भूमिका निभा सकें।
जिनपिंग का संदेश: प्रतिद्वंद्विता के बजाय साझेदारी
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि चीन और अमेरिका की सफलता एक-दूसरे के लिए अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा, “सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ होता है, जबकि टकराव से नुकसान। दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार होना चाहिए और नए युग में बड़े देशों के बीच संबंधों का सही रास्ता बनाना चाहिए।”
चर्चा के 4 प्रमुख मुद्दे
इस शिखर सम्मेलन में व्यापार और तकनीक के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा पर गहन मंथन हो रहा है:
- ईरान संकट और पश्चिम एशिया: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ट्रंप ने जिनपिंग से ईरान पर दबाव बनाने और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने में मदद मांगी है।
- ताइवान और रक्षा सौदे: चीन ने स्पष्ट किया है कि ताइवान उसकी ‘रेड लाइन’ है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए $11 बिलियन के हथियार पैकेज को मंजूरी दे रखी है।
- व्यापार और टैरिफ: ट्रंप के साथ एलन मस्क (Tesla) और जेन्सेन हुआंग (Nvidia) जैसे दिग्गज बिजनेस लीडर भी बीजिंग पहुंचे हैं, जिनका लक्ष्य व्यापार बाधाओं को कम करना और निवेश बढ़ाना है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): दोनों देश AI सुरक्षा और चिप तकनीक के निर्यात पर भी आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय रुपया $95.80 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है और वैश्विक तेल कीमतें $107 प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। ट्रंप की इस यात्रा के नतीजों का सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों और भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ना तय है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और जिनपिंग की यह मुलाकात दुनिया को मंदी और युद्ध के खतरों से बाहर निकालने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है, बशर्ते दोनों देश अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर साझा हितों पर काम करें।


