भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में 14 मई 2026 का दिन कीमतों में एक बड़ी हलचल के रूप में दर्ज किया गया है। सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने के फैसले के बाद दिल्ली से लेकर मुंबई तक कीमती धातुओं की कीमतों में ‘रॉकेट’ जैसी तेजी देखी जा रही है।
चांदी की कीमतों में ₹23,000 से अधिक का उछाल
बीते सत्र में चांदी ने निवेशकों को हैरान कर दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ₹23,816 की भारी बढ़त के साथ ₹3,02,878 प्रति किलो तक जा पहुंची। वहीं, दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत ₹20,500 उछलकर ₹2,97,500 प्रति किलोग्राम हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट और विदेशी मुद्रा बचाने के सरकारी प्रयासों का सीधा असर इन कीमतों पर पड़ा है।
सोना ₹1.65 लाख के ऐतिहासिक स्तर पर
सोने की कीमतों ने भी आज नए रिकॉर्ड बनाए हैं। दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹8,550 की छलांग लगाकर ₹1,65,350 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी सोना ₹8,906 की बढ़त के साथ ₹1,62,348 पर ट्रेड करता दिखा।
प्रमुख शहरों में आज के भाव (प्रति 10 ग्राम)
इंपोर्ट ड्यूटी लागू होने के बाद आज सुबह विभिन्न शहरों में सोने के औसत रेट (रुपये में) कुछ इस प्रकार हैं:
| शहर | 24K (शुद्ध सोना) | 22K (जेवराती सोना) | 18K (कम शुद्धता) |
| दिल्ली | ₹1,62,150 | ₹1,48,650 | ₹1,21,650 |
| मुंबई | ₹1,62,000 | ₹1,48,500 | ₹1,21,500 |
| चेन्नई | ₹1,63,670 | ₹1,50,000 | ₹1,26,500 |
| कोलकाता | ₹1,62,000 | ₹1,48,500 | ₹1,21,500 |
| जबलपुर/भोपाल | ₹1,62,050 | ₹1,48,550 | ₹1,21,550 |
| लखनऊ/जयपुर | ₹1,62,150 | ₹1,48,650 | ₹1,21,650 |
कीमतें बढ़ने के मुख्य कारण
- इंपोर्ट ड्यूटी में वृद्धि: सरकार ने चालू खाते के घाटे (CAD) को नियंत्रित करने के लिए सोने-चांदी पर आयात शुल्क 15% कर दिया है।
- रुपये में गिरावट: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.80 के निचले स्तर तक गिर गया है, जिससे आयात महंगा हो गया है।
- पश्चिम एशिया संकट: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $107 प्रति बैरल के पार हैं, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है।
एक्सपर्ट की राय
आयात शुल्क बढ़ने से स्थानीय कीमतों में अस्थिरता और फिजिकल डिमांड पर अस्थायी असर पड़ सकता है। हालांकि, लंबे समय के लिए सोना अभी भी एक सुरक्षित निवेश बना हुआ है। व्यापारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में जब लागत का वास्तविक असर बाजार में दिखेगा, तब कीमतों में और स्पष्टता आएगी।


