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    डॉक्टर, इंजीनियर, IAS की ‘अंधी दौड़’ से बाहर निकलें, राहुल गांधी ने कोटा में दी सलाह

    देश की ‘कोचिंग कैपिटल’ कहे जाने वाले कोटा में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम (छात्रों की गूंज) में हिस्सा लिया। नीट (NEET) पेपर लीक मामले और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर देश भर में जारी बहस के बीच राहुल गांधी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने देश के मौजूदा एजुकेशन सिस्टम पर तीखा प्रहार करते हुए युवाओं को ‘डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस (IAS) बनने की अंधी दौड़’ से बाहर निकलने की एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी।

    राहुल गांधी ने क्यों दी यह सलाह?

    राहुल गांधी ने छात्रों के बीच इस बात को विस्तार से समझाया कि भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली युवाओं को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें खारिज करने पर ज्यादा केंद्रित है। उनकी इस सलाह के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हैं:

    यह ‘एजुकेशन सिस्टम’ नहीं, ‘रिजेक्शन सिस्टम’ है

    राहुल गांधी ने वर्तमान परीक्षा और कोचिंग प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज का ढांचा लाखों बच्चों में से केवल कुछ हजार को चुनने और बाकी सबको ‘रिजेक्ट’ (खारिज) करने के लिए बनाया गया है। यह व्यवस्था युवाओं के दिमाग पर भारी मनोवैज्ञानिक दबाव डालती है, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास टूट जाता है।

    प्रतिभा केवल तीन-चार क्षेत्रों तक सीमित नहीं

    उन्होंने कहा कि समाज और माता-पिता ने युवाओं के दिमाग में यह बात बैठा दी है कि जीवन में सफल होने का रास्ता केवल डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक सेवा (IAS) से होकर ही गुजरता है। राहुल गांधी के अनुसार, हर बच्चे के अंदर एक अलग और अनोखी प्रतिभा होती है। कोई संगीत में, कोई खेल में, कोई कोडिंग में तो कोई बिजनेस में बेहतरीन कर सकता है, लेकिन इस अंधी दौड़ के कारण उनकी असली प्रतिभा दम तोड़ देती है।

    कोचिंग और परीक्षाओं का व्यावसायिकरण

    नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हाल ही में सामने आए पेपर लीक और धांधलियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था चंद बड़े उद्योगपतियों और माफियाओं के फायदे के लिए व्यावसायिक रूप ले चुकी है। इस असुरक्षित माहौल में छात्र सालों तक तैयारी करते हैं और अंत में कूटनीतिक या प्रशासनिक कमियों के कारण उनका भविष्य अधर में लटक जाता है।

    युवाओं को राहुल गांधी का सुझाव

    राहुल गांधी ने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें जीवन को देखने का एक नया नजरिया दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे दूसरों के तय किए गए मापदंडों पर जीने के बजाय यह पहचानें कि उन्हें वास्तव में क्या करना पसंद है। किसी एक परीक्षा में असफल होने का मतलब जीवन की असफलता नहीं है। देश और दुनिया में अवसरों का एक बहुत बड़ा आकाश मौजूद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे संसद और सड़क पर युवाओं की इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे ताकि शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी (Inclusive) और छात्रों के अनुकूल बनाया जा सके। कोटा में हर साल लाखों छात्र भारी मानसिक तनाव और दबाव के बीच परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

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