गणेश चतुर्थी का पर्व इस बार 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि गणपति बप्पा विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं, इसलिए उनकी पूजा में शुद्धता और सही पूजा सामग्री का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जिन्हें गणेशजी को अर्पित करने से बचना चाहिए।
गणेशजी को न चढ़ाएं तुलसी
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते। पौराणिक कथा के अनुसार तुलसी और गणेशजी से जुड़ी एक कथा है, जिसके कारण गणपति पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना जाता है। इसलिए पूजा की थाली में तुलसी रखने के बजाय दूर्वा, लाल फूल और अन्य शुभ सामग्री का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।
सफेद चीजों से भी करें परहेज
धार्मिक मान्यताओं में गणेश चतुर्थी की पूजा के दौरान सफेद रंग की वस्तुओं का प्रयोग नहीं करने की बात कही गई है। इसके पीछे चंद्रदेव से जुड़ी पौराणिक कथा बताई जाती है। मान्यता है कि चंद्रमा ने गणेशजी का उपहास किया था, जिसके बाद गणेशजी ने उन्हें शाप दिया था। इसी वजह से पूजा में सफेद वस्तुओं की जगह पीले रंग की सामग्री को शुभ माना जाता है।
टूटे हुए चावल न करें अर्पित
गणेशजी को अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा में टूटे हुए या खंडित चावल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से अक्षत पूर्णता और अखंडता का प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए पूजा सामग्री तैयार करते समय चावल के दानों को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए।
केतकी का फूल भी वर्जित
गणेश पूजा में केतकी का फूल भी नहीं चढ़ाने की मान्यता है। धार्मिक कथाओं में केतकी के फूल का संबंध भगवान शिव से जुड़ी एक कथा से बताया जाता है। चूंकि गणेशजी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं, इसलिए कई परंपराओं में उनकी पूजा में भी केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता।
बासी फूल और तामसिक सामग्री से बचें
पूजा में सूखे या मुरझाए फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। भगवान गणेश को ताजे फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसी तरह पूजा के दौरान लहसुन-प्याज जैसी तामसिक मानी जाने वाली सामग्री का प्रयोग भी नहीं किया जाता। पूजा के लिए ताजा और सात्त्विक सामग्री रखना धार्मिक परंपराओं के अनुरूप माना जाता है।
काले और नीले वस्त्र भी न चढ़ाएं
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेशजी को काले या नीले रंग के वस्त्र अर्पित करने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर लाल या पीले रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं। पूजा में गणेशजी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और साबुत अक्षत अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
ध्यान रहे कि पूजा-पद्धति और सामग्री को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए स्थानीय परंपरा और अपने परिवार की पूजा-विधि को भी महत्व देना चाहिए। सबसे जरूरी बात श्रद्धा, स्वच्छता और सात्त्विक भाव से गणपति की आराधना करना है।


