पश्चिम एशिया संकट के बीच देश में ईंधन की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे को लेकर विपक्षी दल केंद्र सरकार पर हमलावर हो गए हैं। शनिवार को तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों में एक बार फिर बढ़ोतरी किए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है। खरगे ने केंद्र पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को ‘किश्तों में लूट’ रही है।
‘किश्तों में लूटमार’: मल्लिकार्जुन खरगे का केंद्र पर बड़ा हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट साझा करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए:
- करोड़ों का टैक्स बोझ: खरगे ने कहा, “पेट्रोल अब ₹100 के पार हो चुका है। इस बार जनता की कमाई पर किश्तों में लूटमार हो रही है! पेट्रोल-डीजल पर रोजाना ₹1,000 करोड़ का केंद्रीय टैक्स लगाकर भी भाजपा का पेट नहीं भरा है।”
- वैश्विक मंदी में नहीं दी राहत: उन्होंने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम थे, तब सरकार ने उस वित्तीय लाभ को आम जनता तक नहीं पहुंचाया और मुनाफाखोरी की। अब जब संकट आया है, तो सरकार ने लोगों को त्याग करने का उपदेश देना शुरू कर दिया है।
- नेतृत्व का संकट: खरगे ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के समय जहां दुनिया भर की सरकारें अपनी जनता को महंगाई से बचाने के लिए राहत पैकेज दे रही हैं, वहीं भारत की भाजपा सरकार लगातार टैक्स और कीमतें बढ़ाकर जनता को लूटने में लगी है, जो सरकार की नीतिगत विफलता और नेतृत्व के संकट को दर्शाता है।
10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम, दिल्ली में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर
ईंधन की कीमतों में आई इस ताजा तेजी से आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी असर पड़ा है:
- ताजा बढ़ोतरी: शनिवार सुबह सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। पिछले 10 दिनों के भीतर ईंधन दरों में यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है। पिछले 10 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 5 रुपये प्रति लीटर का भारी इजाफा हो चुका है।
- दिल्ली में नई दरें: इस बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹99.51 प्रति लीटर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल का भाव ₹92.49 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार को आम जनता और मध्यम वर्ग की परेशानियों की कोई चिंता नहीं है और वह केवल तेल कंपनियों तथा पूंजीपतियों के मुनाफे को सुरक्षित करने में व्यस्त है। कीमतों में लगातार हो रहे इस इजाफे से आने वाले दिनों में मालभाड़ा और परिवहन लागत बढ़ने के कारण आवश्यक वस्तुओं की महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


