उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (26 जुलाई 2026) को आगरा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों, शिक्षाविदों और समाज से एक महत्वपूर्ण अपील की। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि भारत की प्रगति से असंतुष्ट विदेशी ताकतें अत्याधुनिक तकनीक और विदेशी फंड का दुरुपयोग करके देश में भ्रम, विद्वेष और अव्यवस्था फैलाने की साजिश रच रही हैं।
आगरा के डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित शिवाजी मंडपम सभागार में ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ के शुभारंभ अवसर पर सीएम योगी ने यह बात कही।
सोशल मीडिया और असत्यापित कंटेंट का खतरा
हालिया छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक ने जहां एक ओर जीवन आसान बनाया है, वहीं इसका दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
- डिजिटल निर्भरता: आज देश का लगभग 60 से 80 फीसदी युवा खबरों, ज्ञान और जानकारी के लिए पूरी तरह स्मार्टफोन, यूट्यूब और सोशल मीडिया पर निर्भर हो चुका है।
- भ्रामक सूचनाएं: गुमनाम खातों और असत्यापित प्लेटफॉर्म के माध्यम से फैलाई जा रही गलत जानकारियों को युवा सच मान बैठते हैं, जिससे समाज में भ्रम और अशांति की स्थिति बनती है।
- गूगल बनाम प्रामाणिकता: सीएम ने कहा कि “गूगल या सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर सामग्री का प्रामाणिक होना जरूरी नहीं है”।
शिक्षकों से ‘ढाल’ बनने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे एक सुरक्षा कवच (ढाल) की तरह कार्य करें और युवाओं को गलत जानकारी से बचाकर ‘राष्ट्र प्रथम’ के मार्ग पर मार्गदर्शन करें।
“एक भ्रमित समाज अंततः अपना ही नुकसान करता है। भारत को अस्थिर करने के हर षड्यंत्र के खिलाफ हमारे शिक्षण संस्थानों को मजबूती से खड़ा होना होगा।”
— योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री (उत्तर प्रदेश)
मुख्य मार्गदर्शन बिंदु:
- पुस्तकालयों का महत्व: युवाओं में किताबें पढ़ने की आदत को पुनः जीवित करें और उन्हें सोशल मीडिया के बजाय संदर्भ ग्रंथों और पुस्तकालयों की ओर ले जाएं।
- सत्य और असत्य में भेद: छात्रों को सिखाएं कि किसी भी सूचना को स्वीकार करने से पहले उसकी सत्यता की जांच कैसे की जाए।
- सकारात्मक कंटेंट निर्माण: शिक्षक स्वयं बेहतर अध्ययन सामग्री और वीडियो बनाकर डिजिटल माध्यमों पर अपलोड करें ताकि छात्रों को प्रामाणिक ज्ञान मिल सके।
पारंपरिक पत्रकारिता से तुलना
सीएम योगी ने प्रिंट मीडिया की तुलना सोशल मीडिया से करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय अखबारों ने जनजागृति में अहम भूमिका निभाई थी क्योंकि वहां संपादकीय जवाबदेही होती थी। इसके विपरीत, सोशल मीडिया पर कोई भी अज्ञात आईडी (अनाम अकाउंट) बनाकर समाज में नफरत फैला सकता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के कल्याण के लिए कैशलेस स्वास्थ्य योजना का भी आधिकारिक रूप से शुभारंभ किया, जिससे राज्यभर के हजारों शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा।


