मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पार्क में भारत की धरती पर जन्मी डेढ़ साल की मादा चीता KGP-11 की मौत हो गई है। वन्यजीव चिकित्सकों की टीम द्वारा काफी प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका, जिससे कूनो में चीतों के कुनबे को एक और बड़ा झटका लगा है।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, 5 जून 2026 की शाम को कूनो नेशनल पार्क के पालपुर पूर्व परिक्षेत्र के मगरदी बोंगा बोमा-2 में तैनात निगरानी दल ने देखा कि मादा चीता KGP-11 सुस्त अवस्था में बैठी है और वह लंगड़ाकर चल रही है। सूचना मिलते ही वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और उसे तुरंत आवश्यक दवाएं दी गईं। बेहतर इलाज के लिए 6 जून की सुबह उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर बोमा से अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों की कड़ी निगरानी और सघन चिकित्सा के बावजूद, दोपहर करीब 2:40 बजे इस युवा मादा चीता ने दम तोड़ दिया।
प्रोजेक्ट चीता के तहत कूनो में संख्या हुई 49
मादा चीता KGP-11 का जन्म भारत में ही नामीबियाई मादा चीता ‘ज्वाला’ (KGP) के कोख से हुआ था। वह कूनो की आबोहवा में ही पली-बढ़ी थी। उसकी असामयिक मौत के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों (शावकों सहित) की कुल संख्या घटकर 49 रह गई है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए शव का पोस्टमार्टम (Post Mortem) कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उसकी मौत किस वजह से हुई। इस घटना ने एक बार फिर कूनो में चीतों के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।


