यूरोप इस समय जलवायु परिवर्तन के कारण अब तक की सबसे भीषण और ऐतिहासिक हीटवेव (भीषण गर्मी) का सामना कर रहा है। पश्चिमी और मध्य यूरोप के कई देशों में तापमान 41 से 45 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर को छू गया है, जिससे भारी तबाही मची है।
फ्रांस में मौत का तांडव: 24 घंटे में भारी बढ़ोतरी
फ्रांस की राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी (Public Health France) के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के चरम (पीक) के दौरान देश में सामान्य से लगभग 1000 से अधिक अतिरिक्त मौतें (Excess Deaths) दर्ज की गई हैं।
- दैनिक मौतों का आंकड़ा: हीटवेव के चरम के दौरान बुधवार को ही देश भर में 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि इसके बाद गुरुवार और शुक्रवार को दैनिक मौतों का आंकड़ा 1,400 को पार कर गया।
- 24 घंटे के भीतर 109 नई मौतें: अस्पताल के आपातकालीन विभागों और घरों से आने वाले आंकड़ों के मुताबिक, केवल 24 घंटे के भीतर ही हीटवेव से जुड़ी कम से कम 109 और मौतें सामने आईं।
- बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा मार: स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक, जान गंवाने वालों में 85% लोग 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे। पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के पास आने वाले फोन कॉल्स में 75% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। फ्रांस के 54 विभागों (जिलों) में ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है।
जर्मनी में पिघला बुनियादी ढांचा: थम गया ट्राम नेटवर्क
जर्मनी में भी गर्मी ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। देश के नीशामुंडे (Neißemünde) में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो जर्मनी के इतिहास में जून का सबसे उच्चतम स्तर है। इस भीषण गर्मी का सीधा असर देश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है:
- ट्राम नेटवर्क पूरी तरह बंद: पूर्वी जर्मनी के प्रमुख शहर लीपज़िग (Leipzig) में भयंकर गर्मी के कारण पटरियों के बीच डामर (Asphalt) और कंक्रीट को जोड़ने वाला ‘जॉइंट सीलेंट’ (Joint Sealant) पूरी तरह पिघलकर बह गया। यह पिघला हुआ गाढ़ा पदार्थ रेलवे ट्रैक और स्विचेस (Points) में जाकर जमा हो गया।
- सुरक्षा के चलते फैसला: पटरियों पर डामर जमने और ट्रैक को पहुंचे नुकसान के कारण लीपज़िग ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (LVB) ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए शहर के पूरे ट्राम नेटवर्क को “अगले आदेश तक” निलंबित कर दिया है। शहर में फिलहाल केवल बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। लीपज़िग के अलावा नूर्नबर्ग (Nuremberg) में भी पटरियों और सड़कों के पिघलने के कारण ट्राम सेवाएं रोकनी पड़ी हैं।
- हाईवे और ट्रेनें भी प्रभावित: कंक्रीट की परतें उखड़ने के कारण जर्मनी के कई प्रमुख हाईवे को बंद करना पड़ा है, जबकि नेशनल रेल ऑपरेटर ‘ड्यूश बान’ (Deutsche Bahn) ने यात्रियों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: “जलवायु परिवर्तन के बिना यह असंभव था”
‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक त्वरित विश्लेषण में सामने आया है कि यूरोप में चल रही यह ऐतिहासिक गर्मी और अत्यधिक उमस मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन के बिना पूरी तरह असंभव थी। यह हीटवेव अब तेजी से पूर्वी यूरोप और बाल्कन देशों की ओर बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया में सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है।


