उपभोक्ता मामले मंत्रालय (Department of Consumer Affairs) ने खाद्य तेलों की पैकेजिंग को लेकर नया नियम लागू कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य बाजार में उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाना और पारदर्शी मूल्य तुलना की सुविधा प्रदान करना है।
क्यों बदले गए packaging नियम?
- ब्रांड्स की ‘श्रिंकफ्लेशन’ और भ्रमित करने वाले पैक: अब तक कंपनियां 650ml, 700ml, 810ml, 850ml और 870ml जैसे अलग-अलग वजन व वॉल्यूम के पाउच और बोतलें बाजार में बेच रही थीं। समान दिखने वाले इन पैकेटों के कारण आम ग्राहकों के लिए दो अलग-अलग ब्रांडों की सही कीमत (Price Comparison) की तुलना करना कठिन हो गया था।
- पारदर्शिता बढ़ाना: विभिन्न गैर-मानक साइज के कारण उपभोक्ता यह नहीं समझ पाते थे कि उन्हें सही मात्रा मिल रही है या नहीं। नए नियमों के लागू होने से ग्राहक आसानी से तय कर सकेंगे कि कौन सा ब्रांड वैल्यू फॉर मनी है।
- मात्रा और वजन का स्पष्ट उल्लेख: नए SOP (लीगल मेट्रोलॉजी फ्रेमवर्क) के तहत अगर खाद्य तेल की मात्रा लीटर/मिलीलीटर (वॉल्यूम) में दर्ज है, तो उसके साथ उसका समतुल्य वजन (किग्रा/ग्राम) भी लिखना अनिवार्य होगा।
अब कौन-कौन से साइज में मिलेगा तेल?
मंत्रालय ने प्रमुख खाद्य तेलों (जैसे सरसों, सोयाबीन, सनफ्लावर, पाम ऑयल, मूंगफली, राइस ब्रान आदि) के लिए 9 स्टैंडर्ड पैकेजिंग साइज तय किए हैं:
- छोटे पैक: 200 ml/g, 500 ml/g
- घरेलू इस्तेमाल के पैक: 1 लीटर/किग्रा, 2 लीटर/किग्रा, 3 लीटर/किग्रा, 4 लीटर/किग्रा, 5 लीटर/किग्रा
- कमर्शियल व बल्क पैक: 15 लीटर/किग्रा और 20 लीटर/किग्रा
(नोट: 200 मिलीलीटर से छोटे पाउच/सैश तथा विशेष माइनर ऑयल को इससे छूट दी गई है ताकि गरीब और दैनिक मजदूर आसानी से छोटे पाउच खरीद सकें।)
क्या फिर बढ़ सकते हैं रसोई के तेल के दाम?
ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पैकेजिंग के इस बदलाव से रसोई तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा:
- तत्काल प्रभाव से कीमतें नहीं बढ़ेंगी: उद्योग विशेषज्ञों और IVPA (इण्डियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन) का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से तेल की मूल लागत पर कोई बड़ा अंतर नहीं आएगा। यह केवल पैकेजिंग का री-स्टैंडर्डाइजेशन है।
- ग्राहकों को होगा फायदा: पैकेट की वास्तविक मात्रा स्पष्ट होने के कारण कंपनियां हिडन प्राइस हाइक (यानी मात्रा घटाकर दाम वही रखने की चाल) नहीं कर सकेंगी।
- कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर: भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए खाद्य तेल की कीमतें पैकेजिंग नियमों की जगह अंतरराष्ट्रीय क्रूड पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल के दामों और आयात शुल्क (Import Duty) से तय होंगी।
उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम भारतीय ग्राहकों को अनजाने वित्तीय नुकसान से बचाएगा। अब 1 लीटर या 500ml के फिक्स्ड पैक मिलने से बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनेगी और ग्राहकों को अपनी गाढ़ी कमाई का पूरा लाभ मिलेगा।


