पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच भारतीय आर्थिक जगत से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार से लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सीधे युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला और रिपोर्ट का दावा?
सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट (West Asia Crisis) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसी बीच बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के हवाले से यह दावा किया गया कि आरबीआई के स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
आशंका जताई जा रही है कि केंद्रीय बैंक ने भारतीय रुपये (INR) की स्थिति को मजबूत बनाए रखने और विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने के लिए इस सोने का एक हिस्सा बाजार में जारी किया है या मूल्य समायोजन (Valuation Effect) के कारण यह बदलाव दिखा है। हालांकि, आमतौर पर आरबीआई सोने को रणनीतिक संपत्ति के रूप में सुरक्षित रखता है और उसे बेचने के बजाय लगातार खरीदने की नीति पर चलता रहा है।
सोने की संभावित बिक्री के पीछे के आर्थिक कारण
अगर इन दावों में सच्चाई है, तो आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे निम्नलिखित रणनीतिक कारण हो सकते हैं:
- रुपये को रिकॉर्ड गिरावट से बचाना: अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार (Share Market) से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर भारी दबाव है। रुपये को संभालने के लिए आरबीआई को डॉलर की तरलता (Liquidity) बढ़ानी पड़ती है, जिसके लिए सोने का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- कच्चे तेल का बढ़ता बिल: खाड़ी देशों में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है। इस महंगे आयात बिल का भुगतान करने के लिए देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की आवश्यकता है।
- प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफावसूली): वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोना अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (Historic Highs) पर कारोबार कर रहा है। मुमकिन है कि आरबीआई ने ऊंचे दामों पर कुछ सोने को भुनाकर अपनी लिक्विड करेंसी (नकद भंडार) को मजबूत करने का फैसला किया हो।
क्या कहता है नियमों का इतिहास? भारत के लिए सोने का मुद्दा हमेशा से संवेदनशील रहा है। साल 1991 के आर्थिक संकट के दौरान भारत को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा था। उसके बाद से देश ने अपने स्वर्ण भंडार को लगातार बढ़ाया है। ऐसे में 12 अरब डॉलर के सोने की कमी की खबर ने नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों को चौंका दिया है।
बाजार और आम जनता पर असर
इस खबर के बाहर आते ही सराफा बाजार और शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। निवेशकों में इस बात को लेकर डर है कि यदि पश्चिम एशिया का युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई में उछाल आने की पूरी आशंका है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण और सटीक आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है।


