भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की यात्रा पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने राहुल गांधी की इस यात्रा की “टाइमिंग” पर सवाल उठाते हुए इसे भारत के रणनीतिक हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ बताया है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और चीन की कमजोरी
भाजपा का तर्क है कि राहुल गांधी का बंगाल चुनाव छोड़कर अचानक अंडमान पहुंचना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि भारत के ‘ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट’ को बाधित करने की एक कोशिश है।
- मलक्का स्ट्रेट (Malacca Strait): भाजपा ने याद दिलाया कि साल 2003 में चीन ने स्वयं स्वीकार किया था कि मलक्का जलडमरूमध्य उसकी सबसे बड़ी कमजोरी (Malacca Dilemma) है। चीन का लगभग 80% ऊर्जा आयात इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है।
- रणनीतिक महत्व: केंद्र सरकार का नया प्रोजेक्ट इसी मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित है। इसके पूरा होने से भारत की समुद्री निगरानी क्षमता और सैन्य शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे चीन की घेराबंदी मजबूत होगी।
भाजपा के गंभीर आरोप
बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा है:
- चीन का समर्थन: अक्सर चर्चा होती है कि जब चीन ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (String of Pearls) रणनीति के तहत भारत को चारों ओर से घेर रहा था, तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार मौन रही।
- प्रोजेक्ट का विरोध: अब जब वर्तमान सरकार भारत की रक्षात्मक स्थिति को अभेद्य बना रही है, तो राहुल गांधी का इस प्रोजेक्ट के विरोध में खड़े होना उनकी मंशा पर सवाल उठाता है। भाजपा ने संकेत दिया कि राहुल की यह यात्रा चीन की “घबराहट” को कम करने या प्रोजेक्ट में अड़ंगा डालने की कोशिश हो सकती है।
राजनीतिक गर्माहट
राहुल गांधी ने इस यात्रा के दौरान स्थानीय जनजातियों और पर्यावरण के मुद्दों को लेकर सरकार के प्रोजेक्ट पर चिंता जताई है। वहीं, भाजपा इसे “विकास बनाम विनाश” की बहस के बजाय “राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम विदेशी एजेंडा” के रूप में पेश कर रही है।
अंडमान और निकोबार में भारत का यह निवेश हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है। भाजपा का मानना है कि ऐसे समय में विपक्ष का विरोध देश के सामरिक हितों को नुकसान पहुँचाने वाला है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल और अन्य राज्यों के चुनावी विमर्श में भी राष्ट्रवाद के साथ जुड़कर और तूल पकड़ सकता है।


