अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट (Sri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) के पूर्व महासचिव चंपत राय इन दिनों राम मंदिर भूमि खरीद और चंदे को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के कारण विवादों के घेरे में हैं। इस सियासी घमासान और “चंदा चोरी” के आरोपों के बीच, आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के उस जिले के बारे में जहां चंपत राय का पुश्तैनी घर है और कैसे उन्होंने एक प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राम मंदिर आंदोलन को समर्पित कर दिया।
उत्तर प्रदेश के इस जिले से है चंपत राय का नाता
चंपत राय का जन्म और पुश्तैनी घर उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) जिले के नगीना (Nagina) कस्बे में है।नगीना के सराय मीर (कटरा) मोहल्ले में उनका एक बेहद साधारण और पुराना पुश्तैनी मकान है। उनके पिता का नाम रामेश्वर प्रसाद बंसल था। चंपत राय के भाई और उनका परिवार आज भी इसी नगीना कस्बे में बेहद सादगी के साथ रहता है। नगीना के स्थानीय निवासी और उनके पड़ोसी आज भी चंपत राय की ईमानदारी, सादगी और कड़क अनुशासन की मिसाल देते हैं। विवादों के बावजूद स्थानीय लोग उन्हें एक निष्कलंक और समर्पित राष्ट्रभक्त के रूप में देखते हैं।
प्रोफेसर की शानदार नौकरी छोड़ी और संघ के हुए
चंपत राय पढ़ाई-लिखाई में बेहद मेधावी थे। उन्होंने भौतिक विज्ञान (Physics) में पोस्ट ग्रेजुएशन (M.Sc.) की डिग्री हासिल की थी।
- प्रोफेसर के रूप में करियर: अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वे धामपुर (बिजनौर) के प्रतिष्ठित आरएसएम डिग्री कॉलेज (RSM Degree College) में फिजिक्स के प्रवक्ता (Lecturer/Professor) नियुक्त हुए।
- नौकरी का त्याग: कॉलेज में पढ़ाते हुए ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से गहराई से जुड़ चुके थे। देश और संगठन के प्रति उनका समर्पण इस कदर बढ़ा कि उन्होंने एक प्रोफेसर की सुरक्षित और सम्मानजनक सरकारी नौकरी को लात मार दी और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।
आपातकाल (Emergency) में काटी 18 महीने की जेल
चंपत राय के जीवन में एक बड़ा मोड़ सन 1975 में आया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया था।
- क्रूर यातनाएं और गिरफ्तारी: आपातकाल के दौरान जब संघ पर प्रतिबंध लगा, तो चंपत राय ने भूमिगत होकर लोकतंत्र की बहाली के लिए काम किया। इस दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
- 18 महीने जेल में: वे आपातकाल के दौरान उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में करीब 18 महीने (डेढ़ साल) तक कैद रहे। जेल में रहते हुए भी उन्होंने घुटने नहीं टेके और कड़ा संघर्ष किया, जिसने उन्हें संगठन में एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय नेता के रूप में स्थापित कर दिया।
राम मंदिर आंदोलन के ‘इंजीनियर’ और ट्रस्ट के महासचिव
आपातकाल के बाद चंपत राय को विश्व हिंदू परिषद (VHP) में अहम जिम्मेदारी दी गई। वे लंबे समय तक विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव रहे और अशोक सिंघल के बेहद करीबी सिपहसालार बने।
सन 1992 में विवादित ढांचा ढहने के दौरान और उसके बाद चले लंबे कानूनी विवाद में चंपत राय ने अयोध्या आंदोलन के हर एक दस्तावेज, गवाही और सबूत को सहेजने में मुख्य भूमिका निभाई। यही कारण है कि जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन हुआ, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने उन्हें इस बेहद महत्वपूर्ण ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त किया।
आज भले ही जमीन सौदों को लेकर उन पर उंगलियां उठ रही हैं और विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है, लेकिन चंपत राय का इतिहास एक बेहद सख्त, अनुशासित और नौकरी-परिवार त्यागने वाले संन्यासी सरीखे प्रचारक का रहा है।


