पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने हाल ही में रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य, विशेषकर 2027 वनडे विश्व कप को लेकर अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की है। धवन, जो स्वयं अपने करियर के अंतिम चरण में केवल एक ही प्रारूप (वनडे) खेल रहे थे, ने बताया कि एक ही फॉर्मेट खेलने से खिलाड़ी पर क्या असर पड़ता है।
1. क्या लय (Rhythm) पर असर पड़ेगा?
धवन ने स्वीकार किया कि जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल एक ही प्रारूप खेलता है, तो मैचों के बीच लंबे अंतराल के कारण उसकी ‘लय’ (Flow) बिगड़ सकती है। उन्होंने अपने अनुभव से बताया कि नियमित मैच न खेलने से मैदान पर वह निरंतरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
2. ‘रो-को’ (Ro-Ko) के लिए क्यों नहीं होगी मुश्किल?
धवन का मानना है कि रोहित और विराट के मामले में यह कोई बड़ी समस्या नहीं होगी, क्योंकि:
- अनुभव और परिपक्वता: वे दोनों बहुत अनुभवी और परिपक्व खिलाड़ी हैं। वे जानते हैं कि किसी भी चुनौती को अवसर में कैसे बदलना है।
- फिटनेस पर ध्यान: धवन ने कोहली की फिटनेस की तारीफ की और साथ ही रोहित शर्मा के ‘जबरदस्त शारीरिक बदलाव’ (Fitness Transformation) को सराहा। उन्होंने कहा कि जब मैच कम होते हैं, तो खिलाड़ी अपनी फिटनेस पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
- पर्याप्त मैच: धवन ने बताया कि 2027 विश्व कप से पहले भारत का शेड्यूल ऐसा है कि उन्हें लय हासिल करने के लिए पर्याप्त वनडे मैच खेलने को मिलेंगे।
3. शिखर धवन का अपना अनुभव
धवन ने तुलना करते हुए कहा कि उनके समय में (2021-22) लगातार टी20 विश्व कप हो रहे थे, जिसके कारण वनडे मैच बहुत कम अंतराल पर होते थे। लेकिन अब 2027 विश्व कप की तैयारी के लिए इन दोनों के पास तैयारी का पूरा समय और सही मंच है।
4. उभरते सितारे: वैभव सूर्यवंशी का जिक्र
इसी बातचीत के दौरान धवन ने 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उम्र के बजाय प्रदर्शन को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने वैभव की निडरता का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से वह जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह जैसे गेंदबाजों का सामना कर रहे हैं, वह अद्भुत है।
शिखर धवन पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि रोहित शर्मा और विराट कोहली अपनी फिटनेस और अनुभव के दम पर 2027 विश्व कप में भारत के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं और प्रारूप की सीमित संख्या उनकी राह में रोड़ा नहीं बनेगी।


