अयोध्या के भव्य राम मंदिर में करोड़ों रुपये की चढ़ावा राशि (चंदा) गायब होने के विवाद के बाद अब एक और नया और बेहद सनसनीखेज दावा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राम मंदिर से भगवान के चढ़ावे के कीमती जेवरात, जिनमें करोड़ों रुपये का सोना-चांदी और विशेष रूप से दो किलो वजन की सोने की गदा शामिल है, गायब होने की आशंका जताई जा रही है। इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) ने जांच शुरू कर दी है।
पूर्व ड्राइवर राम शंकर पर गंभीर आरोप
इस पूरे घोटाले और चोरी के मामले में सबसे गंभीर आरोपों के घेरे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के चहेते और पूर्व ड्राइवर राम शंकर यादव आए हैं।
- विशेष छूट का फायदा: बताया जा रहा है कि चंपत राय का करीबी होने के कारण राम शंकर को मंदिर की व्यवस्था और कार्यालय के कार्यों में काफी विशेष छूट मिली हुई थी। Indiatimes
- अमीर श्रद्धालुओं से सीधा संपर्क: आरोप है कि उसने मंदिर प्रशासन को दरकिनार कर बाहर से आने वाले बड़े और उद्योगपति (करोड़पति) श्रद्धालुओं से सीधे वीआईपी व्यवस्था के नाम पर संपर्क बना रखे थे। Indiatimes
- जांच के घेरे में अचानक बढ़ी संपत्ति: एसआईटी की जांच के दायरे में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के कुछ खास चहेते लोग और राम शंकर शामिल हैं, जिनकी वित्तीय और आर्थिक स्थिति (माली हालत) में पिछले कुछ समय में अचानक कई गुना की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
एसआईटी (SIT) की जांच और बैंक कर्मचारियों पर शक
चढ़ावा राशि और साक्ष्य मिटाने के इस गंभीर मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) हर पहलू को खंगाल रही है:
- बैंक की काउंटिंग टीम पर निशाना: मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता का आरोप है कि स्टेट बैंक द्वारा पैसे गिनने के लिए जिस निजी एजेंसी के कर्मचारियों को तैनात किया गया था, मुख्य रूप से उन्हीं लोगों ने इस चोरी को अंजाम दिया है।
- लापरवाही पर भी सवाल: ट्रस्ट के अनुसार, चढ़ावे की राशि को 10-10 गड्डियों के बंडल बनाकर, बक्से में सील करके बैंक भेजा जाता था। ऐसे में ट्रस्ट की अपनी सर्विलांस और निगरानी टीम की बड़ी लापरवाही भी सामने आ रही है। काउंटिंग टीम से जुड़े सभी संदिग्ध कर्मचारियों और जिम्मेदार पदाधिकारियों से गहन पूछताछ की जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी और संगठनों की चुप्पी
इस मामले के सामने आने के बाद देश का सियासी पारा गरमा गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया और इसे वैश्विक स्तर पर भगवान राम के भक्तों के लिए गहरी चिंता और ट्रस्ट के लिए शर्मनाक विषय बताया है। उन्होंने इस मामले पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। दूसरी तरफ, बाबरी केस के पूर्व मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने भी दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस पूरे विवाद पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है।


